Wazu Karne Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको साफ़ और आसान अल्फ़ाज़ में बताएंगे कि वुज़ू शुरू करते समय क्या पढ़ना चाहिए। साथ ही यहां आपको वुज़ू से पहले की दुआ, अरबी, रोमन इंग्लिश, हिंदी तर्जुमा और वुज़ू के बाद पढ़ी जाने वाली मस्नून दुआ भी मिलेगी।
Wazu Karne Ki Dua in Hindi | वुज़ू करने की दुआ
वुज़ू नमाज़ के लिए पाकीज़गी हासिल करने का अहम ज़रिया है। क़ुरआन में नमाज़ के लिए उठते समय चेहरा, हाथ, सिर का मसह और पैर धोने का हुक्म बयान हुआ है।
Wazu Karne Ki Dua in Hindi
वुज़ू शुरू करते समय पढ़ें:
बिस्मिल्लाह।
वुज़ू की शुरुआत में अल्लाह का नाम लेने का ज़िक्र हदीस में मिलता है। इसलिए वुज़ू शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह” कहना चाहिए।
Wazu Karne Ki Dua in Arabic
بِسْمِ اللَّهِ
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
बहुत से लोग वुज़ू शुरू करते समय यह भी पढ़ते हैं:
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
लेकिन वुज़ू के शुरू में हदीस से जो ज़िक्र मिलता है, वह अल्लाह का नाम लेना है, यानी “बिस्मिल्लाह”।
Wazu Karne Ki Dua in Roman English
Bismillah.
और बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम:
Bismillahir-Rahmanir-Rahim.
Wazu Karne Ki Dua Ka Hindi Tarjuma
बिस्मिल्लाह का मतलब है:
अल्लाह के नाम से।
और:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम का अर्थ है:
अल्लाह के नाम से, जो बहुत मेहरबान, निहायत रहम करने वाला है।
वुज़ू से पहले कौन-सी दुआ पढ़नी चाहिए?
वुज़ू शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” कहना चाहिए। सुनन अबू दाऊद की एक रिवायत में नबी ﷺ से वुज़ू की शुरुआत में अल्लाह का नाम लेने का ज़िक्र मिलता है। इस रिवायत को कुछ मुहद्दिसीन ने सहीह कहा है।
इसी वजह से वुज़ू शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह” कहना एक आसान और प्रमाणित तरीका है।
क्या “बिस्मिल्लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि अला दीनिल-इस्लाम” वुज़ू की दुआ है?
यह जुमला कुछ किताबों और वेबसाइटों पर वुज़ू से पहले पढ़ने के लिए मिलता है। लेकिन इसे वुज़ू की निश्चित और सहीह मस्नून दुआ के रूप में नबी ﷺ से साबित करना सही नहीं है।
इसलिए वुज़ू शुरू करते समय सबसे सुरक्षित और प्रमाणित तरीका “बिस्मिल्लाह” कहना है। एक हनफ़ी हदीस-स्रोत भी स्पष्ट करता है कि “बिस्मिल्लाह” कहना पर्याप्त है, जबकि “बिस्मिल्लाहि वल्हम्दु लिल्लाह” के लिए अलग रिवायत पेश की जाती है जिसकी चर्चा अलग से की गई है।
वुज़ू के दौरान क्या पढ़ें?
वुज़ू करते समय हर अंग को धोने के लिए अलग-अलग खास दुआएँ पढ़ने की बातें आम तौर पर लोगों में मशहूर हैं, लेकिन उन्हें नबी ﷺ की सहीह और निश्चित सुन्नत के रूप में पेश करने के लिए मजबूत प्रमाण जरूरी है।
इसलिए बिना प्रमाण किसी खास दुआ को वुज़ू के हर अंग के साथ निश्चित सुन्नत समझना उचित नहीं है।
वुज़ू के दौरान सही तरीके से पाकीज़गी हासिल करना और अल्लाह तआला को याद रखना अहम है।
वुज़ू के बाद की दुआ
वुज़ू पूरा करने के बाद यह दुआ सहीह हदीस में आई है:
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीक लहू, व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।
इसका मतलब है:
मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं; और मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।
जामिअ अत-तिर्मिज़ी की रिवायत में इसके साथ यह दुआ भी आई है:
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ
अल्लाहुम्मज्अल्नी मिनत-तव्वाबीन वज्अल्नी मिनल-मुततह्हिरीन।
यानी:
ऐ अल्लाह! मुझे बहुत तौबा करने वालों में और पाक रहने वालों में शामिल फ़रमा।
इस हदीस में वुज़ू अच्छी तरह करने के बाद यह ज़िक्र पढ़ने की फ़ज़ीलत भी बयान हुई है।
वुज़ू करने का आसान तरीका
क़ुरआन की सूरह अल-माइदा की आयत 6 में वुज़ू के बुनियादी अंगों का ज़िक्र मिलता है—चेहरा धोना, हाथों को कोहनियों तक धोना, सिर का मसह करना और पैरों को टखनों तक धोना।
वुज़ू शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह” कहें और फिर अपने फ़िक़्ही मज़हब या किसी भरोसेमंद आलिम की बताई हुई सही विधि के मुताबिक़ वुज़ू पूरा करें।
वुज़ू की दुआ की फ़ज़ीलत
वुज़ू खुद एक अहम इबादत और नमाज़ की तैयारी का ज़रिया है। वुज़ू की शुरुआत में अल्लाह का नाम लेना हदीस में आया है।
वुज़ू पूरा करने के बाद तौहीद और रिसालत की गवाही वाली दुआ पढ़ने की भी सहीह रिवायत मौजूद है और उसमें बड़ी फ़ज़ीलत बयान हुई है।
हालांकि, यह दावा करना सही नहीं होगा कि वुज़ू से पहले कोई खास लंबी दुआ पढ़ने से निश्चित रूप से कोई खास फ़ायदा या लगातार सवाब मिलता रहेगा, जब तक उसके लिए विश्वसनीय दलील मौजूद न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वुज़ू करने से पहले क्या पढ़ना चाहिए?
वुज़ू शुरू करते समय:
बिस्मिल्लाह
कहना चाहिए।
Wazu Karne Ki Dua in Hindi क्या है?
बिस्मिल्लाह।
इसका मतलब है:
अल्लाह के नाम से।
क्या वुज़ू से पहले बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़ सकते हैं?
जी हां, बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़ना अल्लाह के नाम से शुरुआत करना है। लेकिन वुज़ू की शुरुआत के लिए हदीस में अल्लाह का नाम लेने का ज़िक्र है, इसलिए “बिस्मिल्लाह” कहना पर्याप्त है।
क्या “बिस्मिल्लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि अला दीनिल-इस्लाम” वुज़ू की मस्नून दुआ है?
इसे वुज़ू से पहले की निश्चित मस्नून दुआ के रूप में सहीह हदीस से साबित करना उचित नहीं है। इसलिए वुज़ू शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह” कहना ज्यादा स्पष्ट और प्रमाणित तरीका है।
वुज़ू के बाद कौन-सी दुआ पढ़ें?
वुज़ू के बाद:
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
पढ़ना सहीह हदीस से साबित है। इसके साथ “अल्लाहुम्मज्अल्नी मिनत-तव्वाबीन…” भी रिवायत में आया है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Wazu Karne Ki Dua in Hindi के बारे में सही और आसान जानकारी मिल गई होगी।
वुज़ू शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह” कहना याद रखें और वुज़ू को सही तरीके से पूरा करें। वुज़ू के बाद नबी ﷺ से साबित दुआ पढ़ना भी एक बेहतरीन अमल है।
वुज़ू से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ के बारे में सबसे अहम बात यह है कि किसी ऐसे लंबे जुमले को नबी ﷺ की पक्की मस्नून दुआ न कहा जाए जिसकी स्पष्ट सहीह दलील मौजूद न हो।
अल्लाह तआला हमें हमेशा पाकीज़गी हासिल करने, नमाज़ और दूसरी इबादतों को सही तरीके से अदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन।
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