Humbistari Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको वह मस्नून दुआ बताएंगे जो नबी-ए-करीम ﷺ ने पति-पत्नी के बीच संबंध बनाने से पहले पढ़ने की तालीम दी है। यहां आपको यह दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ मिलेगी, ताकि आप इसे आसानी से पढ़ और याद कर सकें।
Humbistari Ki Dua in Hindi | हमबिस्तरी की दुआ
यह दुआ हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है और सहीह अल-बुख़ारी 6388 तथा सहीह मुस्लिम 1434a में दर्ज है। हदीस में इसके पढ़ने का समय भी स्पष्ट है—यानी पति अपनी पत्नी के पास जाने का इरादा करे, तो संबंध बनाने से पहले यह दुआ पढ़े।
Humbistari Ki Dua in Hindi
बिस्मिल्लाह, अल्लाहुम्मा जन्निब्नश्शैतान, व जन्निबिश्शैतान मा रज़क़्तना।
Humbistari Ki Dua in Arabic
بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
यह दुआ हमबिस्तरी शुरू करने से पहले पढ़ी जाती है।
Humbistari Ki Dua in Roman English
Bismillah, Allahumma jannibnash-shaitan, wa jannibish-shaitana ma razaqtana.
हमबिस्तरी की दुआ का हिंदी तर्जुमा
अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह! हमें शैतान से दूर रख और जो औलाद तू हमें अता फ़रमाए, उसे भी शैतान से दूर रख।
इस दुआ में अल्लाह तआला से शैतान से हिफ़ाज़त और आने वाली औलाद के लिए भी उसकी पनाह मांगी जाती है।
हमबिस्तरी की दुआ कब पढ़नी चाहिए?
हदीस के मुताबिक़ यह दुआ सोहबत से पहले पढ़नी चाहिए। यानी जब पति-पत्नी संबंध बनाने का इरादा करें, तो संबंध शुरू करने से पहले यह दुआ पढ़ी जाए।
इसे संबंध खत्म होने के बाद पढ़ने की दुआ नहीं बताया गया है।
हमबिस्तरी की दुआ की हदीस
हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:
अगर तुम में से कोई अपनी पत्नी के पास जाने का इरादा करे और कहे:
بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
और अगर उस संबंध से बच्चा मुक़द्दर में हो, तो शैतान उस बच्चे को नुक़सान नहीं पहुंचा सकेगा।
यह हदीस सहीह अल-बुख़ारी 6388 और सहीह मुस्लिम 1434a में मौजूद है।
हमबिस्तरी की दुआ की फ़ज़ीलत
इस दुआ की सबसे अहम फ़ज़ीलत वही है जो सहीह हदीस में बयान हुई है। नबी ﷺ ने बताया कि अगर उस संबंध से बच्चा पैदा होना मुक़द्दर हो, तो इस दुआ के कारण शैतान उस बच्चे को नुक़सान नहीं पहुंचा सकेगा।
यहां यह समझना भी ज़रूरी है कि हदीस में “शैतान उस बच्चे को नुक़सान नहीं पहुंचाएगा” कहा गया है। इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि बच्चा हर तरह की परेशानी, गुनाह या आज़माइश से पूरी तरह महफ़ूज़ रहेगा।
क्या हमबिस्तरी से पहले वुज़ू करना ज़रूरी है?
हमबिस्तरी से पहले वुज़ू करना संबंध की शर्त नहीं है। इसलिए इसे ज़रूरी या फ़र्ज़ बताना सही नहीं होगा।
अलबत्ता, अगर कोई व्यक्ति पाकीज़गी और तहारत के लिए वुज़ू करना चाहे तो यह अलग बात है। इसे इस दुआ की अनिवार्य शर्त नहीं समझना चाहिए।
हमबिस्तरी के बाद ग़ुस्ल कब करना चाहिए?
सोहबत के बाद अगर जनाबत की हालत हो जाए तो नमाज़ और उन इबादतों से पहले ग़ुस्ल-ए-जनाबत करना ज़रूरी है जिनके लिए पाकीज़गी शर्त है।
यह बात हमबिस्तरी की दुआ से अलग एक शरीअती हुक्म है।
क्या हमबिस्तरी के लिए कोई खास तरीका भी हदीस में है?
इस दुआ की सहीह हदीस में मुख्य बात यह है कि पति-पत्नी के संबंध से पहले “बिस्मिल्लाह…” वाली दुआ पढ़ी जाए।
इस एक हदीस में क़िबला की तरफ़ रुख़ करने या न करने, खड़े होकर या किसी खास स्थिति में संबंध बनाने, या संबंध के बाद तुरंत कोई खास अमल करने का हुक्म नहीं दिया गया। इसलिए ऐसी बातों को इस दुआ का हिस्सा या इस हदीस की निश्चित सुन्नत बताना उचित नहीं है।
साथ ही, पति-पत्नी के संबंध से जुड़ी निजी बातों में हया, पर्देदारी, एक-दूसरे के हक़ और सम्मान का ख़याल रखना चाहिए।
क्या यह दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
यह दुआ नबी-ए-करीम ﷺ से मस्नून है, इसलिए इसे पढ़ना चाहिए। लेकिन इसे फ़र्ज़ या वैध निकाह की शर्त नहीं कहा जाना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति दुआ पढ़ना भूल जाए, तो केवल इस वजह से निकाह या संबंध के सही होने पर कोई सवाल नहीं उठता। दुआ पढ़ना एक सुन्नत अमल है।
क्या महिला भी यह दुआ पढ़ सकती है?
हदीस में इस दुआ की तालीम पति के अपनी पत्नी के पास जाने के संदर्भ में आई है। दुआ के अल्फ़ाज़ “जन्निब्ना” यानी “हमें दूर रख” हैं, इसलिए पति-पत्नी दोनों इसका अर्थ समझकर अल्लाह तआला से शैतान से हिफ़ाज़त की दुआ कर सकते हैं।
मुख्य बात यह है कि इसे संबंध शुरू करने से पहले पढ़ा जाए।
हमबिस्तरी की दुआ का आसान मतलब
दुआ को तीन हिस्सों में समझना आसान है:
बिस्मिल्लाह
अल्लाह के नाम से।
अल्लाहुम्मा जन्निब्नश्शैतान
ऐ अल्लाह! हमें शैतान से दूर रख।
व जन्निबिश्शैतान मा रज़क़्तना
और जो औलाद तू हमें अता फ़रमाए, उसे भी शैतान से दूर रख।
इस तरह दुआ का मतलब समझकर इसे याद करना ज्यादा आसान हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हमबिस्तरी की दुआ क्या है?
بِسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
हिंदी उच्चारण:
बिस्मिल्लाह, अल्लाहुम्मा जन्निब्नश्शैतान, व जन्निबिश्शैतान मा रज़क़्तना।
Humbistari Ki Dua in Hindi क्या है?
बिस्मिल्लाह, अल्लाहुम्मा जन्निब्नश्शैतान, व जन्निबिश्शैतान मा रज़क़्तना।
हमबिस्तरी की दुआ का तर्जुमा क्या है?
अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह! हमें शैतान से दूर रख और जो औलाद तू हमें अता फ़रमाए, उसे भी शैतान से दूर रख।
हमबिस्तरी की दुआ कब पढ़नी चाहिए?
यह दुआ पति-पत्नी के संबंध से पहले पढ़नी चाहिए।
हमबिस्तरी की दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ सहीह अल-बुख़ारी 6388 और सहीह मुस्लिम 1434a में हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत हुई है।
इस दुआ की सबसे बड़ी फ़ज़ीलत क्या है?
सहीह हदीस में बताया गया है कि अगर उस संबंध से बच्चा मुक़द्दर में हो, तो शैतान उस बच्चे को नुक़सान नहीं पहुंचा सकेगा।
क्या हमबिस्तरी से पहले वुज़ू ज़रूरी है?
नहीं। वुज़ू हमबिस्तरी की शर्त नहीं है। इस दुआ को पढ़ने के लिए भी वुज़ू की शर्त नहीं बताई गई है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Humbistari Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
यह दुआ नबी-ए-करीम ﷺ से सहीह हदीस में साबित है और इसे पति-पत्नी के संबंध से पहले पढ़ने की तालीम दी गई है। इसकी खास फ़ज़ीलत भी हदीस में बयान हुई है कि उस संबंध से पैदा होने वाली औलाद को शैतान नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा।
इसलिए इस दुआ को याद करें, इसके मतलब को समझें और सोहबत से पहले पढ़ने का एहतिमाम करें। साथ ही हमबिस्तरी से जुड़े दूसरे मसाइल में भी क़ुरआन और सहीह सुन्नत को आधार बनाना चाहिए और गैर-प्रमाणित बातों को दीन का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।
अल्लाह तआला तमाम मुसलमानों को निकाह की ज़िंदगी में मोहब्बत, सुकून, हया और बरकत अता फ़रमाए और नेक व सालेह औलाद नसीब फ़रमाए। आमीन।