azan ke baad ki dua in hindi
आज यहाँ आप रहमत और बरकत से भरपूर एक बेहद ख़ास दुआ, यानी अज़ान के बाद की दुआ (Azan Ke Baad Ki Dua) हिंदी में जानेंगे। हमने इस दुआ को आपके लिए अरबी, हिंदी और इंग्लिश—तीनों भाषाओं में आसान और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया है।
आप इसे आसानी से पढ़कर याद कर सकते हैं और अपने दिलो-ज़ेहन में बसा सकते हैं, ताकि हर बार अज़ान के बाद इस ख़ास दुआ को पढ़कर अल्लाह की ख़ुशनूदी और रहमत हासिल कर सकें।
यक़ीनन, इस दुआ को एक बार अच्छी तरह पढ़ और याद कर लेने के बाद आपको अज़ान के बाद की दुआ के लिए कहीं और तलाश करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। इसलिए दुआ को ध्यानपूर्वक पढ़ें, समझें और इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनाने की कोशिश करें।
अज़ान के बाद की दुआ
अज़ान सुनने के बाद पहले नबी ﷺ पर दरूद शरीफ़ पढ़ना और फिर अज़ान के बाद की यह दुआ करना मुस्तहब बताया गया है। इस दुआ में अल्लाह तआला से नबी ﷺ के लिए वसीला, फ़ज़ीलत और मक़ाम-ए-महमूद अता किए जाने की दुआ की जाती है।
अरबी में
اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ، وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
हिंदी उच्चारण
अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद्दअवतित-ताम्मति, वस्सलातिल-क़ाइमति, आति मुहम्मदनिल-वसीलता वल-फ़ज़ीलता, वबअस्हु मक़ामम-महमूदनिल्लज़ी वअत्तहू।
English Transliteration
Allahumma Rabba haadhihid-da‘watit-taammati, was-salaatil-qaa’imati, aati Muhammadanil-waseelata wal-fadeelata, wab‘ash-hu maqaamam-mahmoodanil-ladhee wa‘adtahu.
हिंदी अर्थ (Azan Ke Baad Ki Dua Ka Tarjuma)
ऐ अल्लाह! इस पूरी दावत (अज़ान) और क़ायम होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद ﷺ को वसीला और फ़ज़ीलत अता फ़रमा और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।
हदीस का संदर्भ
अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ने की फ़ज़ीलत सहीह हदीस में वर्णित है। सहीह अल-बुख़ारी में जाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से रिवायत है कि जो व्यक्ति अज़ान सुनने के बाद नबी ﷺ के लिए यह दुआ करता है, उसके लिए नबी ﷺ की शफ़ाअत की सिफ़ारिश का ज़िक्र आया है।
महत्वपूर्ण नोट
कुछ प्रचलित पाठों में इस दुआ के अंत में “إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ” (इन्नका ला तुख़्लिफ़ुल-मीआद) भी पढ़ा जाता है। हालांकि सहीह अल-बुख़ारी की प्रसिद्ध रिवायत में दुआ “الَّذِي وَعَدْتَهُ” (अल्लज़ी वअत्तहू) पर समाप्त होती है। इसलिए वेबसाइट पर मूल हदीस की दुआ प्रकाशित करते समय “इन्नका ला तुख़्लिफ़ुल-मीआद” को मूल रिवायत का हिस्सा बताने के बजाय अलग से एक प्रचलित अतिरिक्त वाक्य के रूप में उल्लेख करना अधिक उचित है।
अज़ान के बाद की दुआ कैसे पढ़ें?
जब अज़ान मुकम्मल हो जाए, तो सबसे पहले नबी ﷺ पर दरूद शरीफ़ पढ़ें। इसके बाद अज़ान के बाद पढ़ी जाने वाली मस्नून दुआ पढ़ें।
अज़ान के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ एक मर्तबा पढ़ना पर्याप्त है। इसके बाद आप अपने लिए, अपने घरवालों के लिए और तमाम मुसलमानों के लिए अपनी जायज़ दुआएँ भी कर सकते हैं।
अज़ान सुनने, मुअज्जिन के जवाब और उसके बाद दुआ करने के बारे में सहीह अहादीस में स्पष्ट रहनुमाई मिलती है। नबी ﷺ ने अज़ान सुनने वाले को मुअज्जिन के शब्दों का जवाब देने, फिर आप ﷺ पर दरूद भेजने और आपके लिए अल्लाह से वसीला माँगने की तालीम दी है।
अज़ान के वक्त क्या पढ़ना चाहिए?
सिर्फ़ अज़ान खत्म होने के बाद ही दुआ नहीं करनी चाहिए, बल्कि अज़ान के दौरान भी मुअज्जिन के शब्दों का जवाब देना सुन्नत है।
सहीह हदीस के मुताबिक़, जब मुअज्जिन अज़ान के सामान्य कलिमात कहे, तो सुनने वाला भी वही कलिमात दोहराए। लेकिन जब मुअज्जिन “हय्या अलस्सलाह” और “हय्या अलल-फ़लाह” कहे, तो इसके जवाब में “ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह” कहा जाए।
इसे आसान तरीके से इस तरह समझें:
अज़ान: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
जवाब: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
अज़ान: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
जवाब: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
अज़ान: अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह
जवाब: अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह
अज़ान: अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह
जवाब: अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह
अज़ान: अश्हदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
जवाब: अश्हदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अज़ान: अश्हदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
जवाब: अश्हदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अज़ान: हय्या अलस्सलाह
जवाब: ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह
अज़ान: हय्या अलस्सलाह
जवाब: ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह
अज़ान: हय्या अलल-फ़लाह
जवाब: ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह
अज़ान: हय्या अलल-फ़लाह
जवाब: ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह
अज़ान: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
जवाब: अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
अज़ान: ला इलाहा इल्लल्लाह
जवाब: ला इलाहा इल्लल्लाह
इस तरह अज़ान के दौरान मुअज्जिन के साथ जवाब देते हुए अज़ान को ध्यान से सुनना और उसके कलिमात को दोहराना चाहिए।
अज़ान से जुड़े ज़रूरी मसाइल
अज़ान के दौरान बातचीत
अज़ान के दौरान अनावश्यक बातचीत में मशगूल होने के बजाय अज़ान को ध्यान से सुनना और उसका जवाब देना बेहतर और अदब के क़रीब है। हालांकि, “अज़ान के वक्त बात करने वाले का ख़ातिमा बुरे हाल पर होगा” जैसी बात को बिना प्रमाण के निश्चित हदीस या शरीअत का हुक्म नहीं बताना चाहिए।
रास्ते में अज़ान सुनाई दे तो
अगर कोई व्यक्ति रास्ते में हो और उसे अज़ान की आवाज़ सुनाई दे, तो जहाँ संभव हो अज़ान का जवाब देना चाहिए। इसके लिए हर हाल में रास्ते में खड़े होना अनिवार्य है—ऐसा सामान्य और निश्चित हुक्म लिखने से बचना बेहतर है।
अज़ान में नबी ﷺ का नाम सुनने पर
जब मुअज्जिन “अश्हदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह” कहे, तो अज़ान के जवाब के साथ नबी ﷺ पर दरूद भेजना भी मस्नून है। सहीह मुस्लिम की हदीस में अज़ान सुनने के बाद नबी ﷺ पर दरूद भेजने और फिर आपके लिए अल्लाह से वसीला माँगने की स्पष्ट तालीम मिलती है।
अंगूठों को चूमकर आँखों से लगाना
अज़ान में “अश्हदु अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह” सुनकर अंगूठों को चूमकर आँखों से लगाने को नबी ﷺ की सुन्नत के तौर पर नहीं लिखना चाहिए। इस अमल के बारे में कोई सहीह मरफ़ूअ हदीस साबित नहीं है।
अज़ान के दौरान दूसरे काम
अज़ान के समय बेहतर है कि व्यक्ति अपनी व्यस्तता को यथासंभव रोककर अज़ान सुने और उसका जवाब दे। विशेष रूप से ऐसी व्यस्तता से बचना चाहिए जिससे अज़ान का जवाब देने का अवसर ही छूट जाए।
क़ुरआन की तिलावत या दूसरे ज़िक्र के दौरान अज़ान सुनाई देने की स्थिति में अलग-अलग फ़िक़्ही विवरण मिलते हैं। इसलिए इसे एक बिल्कुल सार्वभौमिक और अनिवार्य नियम के रूप में लिखने के बजाय अपने संबंधित मज़हबी फ़िक़्ह के अनुसार अमल करना बेहतर है।
ख़ुत्बे की अज़ान
जुमे के ख़ुत्बे के दौरान होने वाली अज़ान का जवाब ज़बान से देने के बारे में फ़िक़्ही मतभेद और विशेष विवरण पाए जाते हैं। यदि आपका लेख विशेष रूप से हनफ़ी फ़िक़्ह के अनुसार है, तो इसे उसी फ़िक़्ही संदर्भ के साथ लिखना बेहतर होगा, ताकि पाठक को सामान्य सुन्नत और ख़ुत्बे की विशेष स्थिति में अंतर स्पष्ट रहे।
अंतिम लफ़्ज़
मेरे प्यारे मोमिनों! अब तक आप अज़ान के बाद की दुआ, उसे पढ़ने का तरीका और अज़ान के दौरान मुअज्जिन के जवाब से जुड़ी अहम बातें जान चुके होंगे।
अज़ान इस्लाम की एक बहुत ही ख़ूबसूरत निशानी है। इसलिए जब भी अज़ान की आवाज़ सुनाई दे, तो उसे ध्यान से सुनें, मुअज्जिन के शब्दों का जवाब दें और अज़ान मुकम्मल होने के बाद नबी ﷺ पर दरूद भेजकर अज़ान के बाद की मस्नून दुआ पढ़ें।
अल्लाह तआला हमें अज़ान की अहमियत समझने, सुन्नत के मुताबिक़ अमल करने और अपनी दुआओं में ख़ुलूस पैदा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
अगर इस दुआ या अज़ान से जुड़े किसी मसले को समझने में आपको परेशानी हो, तो आप अपने सवाल कमेंट में पूछ सकते हैं। इस जानकारी को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक भी पहुँचाएँ, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग अज़ान के बाद की दुआ और उसके सही तरीके से फ़ायदा उठा सकें।