Aqiqah Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको अक़ीका के जानवर को ज़बह करते समय पढ़े जाने वाले अल्फ़ाज़ बताएंगे। यहां दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ दी गई है, ताकि आप इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।
Aqiqah Ki Dua in Hindi | अक़ीका की दुआ
अक़ीका नवजात बच्चे की पैदाइश के सिलसिले में किया जाने वाला एक मशरूअ अमल है। हदीसों में इसके बारे में कई रिवायतें मौजूद हैं। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा की तरफ़ से अक़ीका किया और ज़बह के समय कुछ खास अल्फ़ाज़ कहने की हिदायत दी। इस रिवायत की सनद को इमाम नववी ने हसन कहा है।
Aqiqah Ki Dua in Hindi
अक़ीका के जानवर को ज़बह करते समय ये अल्फ़ाज़ कहे जा सकते हैं:
बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा लका व इलैक, हाज़िही अकीक़तु फ़ुलान।
यहां “फ़ुलान” की जगह बच्चे का नाम लिया जा सकता है।
मसलन, अगर बच्चे का नाम अहमद है तो कहा जा सकता है:
बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा लका व इलैक, हाज़िही अकीक़तु अहमद।
Aqiqah Ki Dua in Arabic
بِسْمِ اللَّهِ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ لَكَ وَإِلَيْكَ، هَذِهِ عَقِيقَةُ فُلَانٍ
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से इसी तरह के अल्फ़ाज़ रिवायत हुए हैं: “بسم الله والله أكبر، اللهم لك وإليك، هذه عقيقة فلان”। इमाम नववी ने इसकी सनद को हसन बताया है।
Aqiqah Ki Dua in Roman English
Bismillah, wallahu Akbar, Allahumma laka wa ilaika, hadhihi aqiqatu fulan.
यहां Fulan की जगह बच्चे या बच्ची का नाम लिया जा सकता है।
अक़ीका की दुआ का हिंदी तर्जुमा
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! यह तेरे ही लिए है और तेरी ही तरफ़ है। यह फ़लाँ की तरफ़ से अक़ीका है।
यहां “फ़लाँ” से मुराद उस बच्चे या बच्ची का नाम है जिसकी तरफ़ से अक़ीका किया जा रहा है।
अक़ीका की दुआ की हदीस
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हुमा की तरफ़ से अक़ीका किया। रिवायत में ज़बह के समय यह अल्फ़ाज़ आए हैं:
“بسم الله والله أكبر، اللهم لك وإليك، هذه عقيقة فلان”
यानी:
“अल्लाह के नाम से, अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! यह तेरे ही लिए है और तेरी ही तरफ़ है। यह फ़लाँ की तरफ़ से अक़ीका है।”
यह रिवायत अब्दुर्रज़्ज़ाक़ की मुसन्नफ़ और बैहक़ी आदि में मौजूद है, और इमाम नववी ने इसकी सनद को हसन कहा है।
अक़ीका क्या है?
अक़ीका बच्चे की पैदाइश के सिलसिले में किया जाने वाला ज़बह है। अक़ीका के बारे में सहीह और हसन रिवायतें मौजूद हैं।
जामिअ अत-तिर्मिज़ी की हदीस में हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि लड़के की तरफ़ से दो भेड़ और लड़की की तरफ़ से एक भेड़ की जाए। इमाम तिर्मिज़ी ने इस रिवायत को हसन सहीह कहा है।
लड़के और लड़की के अक़ीका में कितने जानवर होते हैं?
हदीस में लड़के की तरफ़ से दो जानवर और लड़की की तरफ़ से एक जानवर का ज़िक्र मिलता है। हज़रत उम्मे कुर्ज़ रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायत में भी यही बात आई है और इमाम तिर्मिज़ी ने उसे हसन सहीह कहा है।
इसलिए आम तौर पर अक़ीका में लड़के के लिए दो और लड़की के लिए एक जानवर का ज़िक्र किया जाता है।
अक़ीका कब किया जाता है?
हदीस में बच्चे के सातवें दिन अक़ीका करने का ज़िक्र आया है। इसी रिवायत में बच्चे के सिर के बाल मुंडाने और नाम रखने का भी उल्लेख है।
अगर किसी वजह से सातवें दिन अक़ीका न हो सके तो उसके बाद के समय के बारे में अलग-अलग फ़िक़्ही तफ़सील पाई जाती है। ऐसी स्थिति में अपने भरोसेमंद आलिम से मसला पूछना बेहतर है।
अक़ीका के जानवर को ज़बह करते समय क्या पढ़ें?
ज़बह करते समय अल्लाह का नाम लेना ज़रूरी है। अक़ीका के सिलसिले में हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायत में यह अल्फ़ाज़ भी मिलते हैं:
بِسْمِ اللَّهِ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ لَكَ وَإِلَيْكَ، هَذِهِ عَقِيقَةُ فُلَانٍ
इसलिए कोई व्यक्ति यह दुआ पढ़ सकता है और बच्चे का नाम लेकर अक़ीका को उसकी तरफ़ मंसूब कर सकता है।
क्या पूरी अक़ीका की दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
पूरी ऊपर दी गई दुआ पढ़ना अक़ीका की वैधता की शर्त नहीं है। ज़बह के समय अल्लाह का नाम लेना अहम है।
इसलिए अगर किसी को ये अतिरिक्त अल्फ़ाज़ याद न हों, तो कम-से-कम “बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर” कहकर ज़बह किया जा सकता है।
यह भी ध्यान रखें कि अक़ीका के बारे में अलग-अलग रिवायतों में कुछ अल्फ़ाज़ के मामूली फर्क मिलते हैं, इसलिए किसी एक रूप को ही एकमात्र जायज़ रूप कहना उचित नहीं है।
बच्चे के लिए अक़ीका की दुआ कैसे पढ़ें?
अगर बच्चे की तरफ़ से अक़ीका किया जा रहा हो तो “फ़ुलान” की जगह बच्चे का नाम लिया जा सकता है।
मसलन:
हाज़िही अकीक़तु मुहम्मद।
अरबी:
هَذِهِ عَقِيقَةُ مُحَمَّدٍ
और अगर बच्ची की तरफ़ से अक़ीका हो तो उसके नाम के मुताबिक़ नाम लिया जाएगा।
इसके लिए कोई अलग लंबी दुआ सहीह हदीस में अनिवार्य तौर पर निर्धारित नहीं की गई है।
क्या अक़ीका की दुआ लड़के और लड़की के लिए अलग है?
ज़बह के समय पढ़े जाने वाले मूल अल्फ़ाज़ में लड़के और लड़की के लिए अलग लंबी दुआ की कोई अनिवार्य रूपरेखा नहीं है। बच्चे का नाम लेकर “हाज़िही अकीक़तु फ़ुलान” कहा जा सकता है।
इसलिए लड़के और लड़की के लिए अलग-अलग लंबी दुआ को सुन्नत की अनिवार्य शर्त समझना सही नहीं होगा।
अक़ीका से जुड़ी कुछ अहम सुन्नतें
अक़ीका के बारे में हदीसों में कई अहम बातें मिलती हैं। सातवें दिन अक़ीका करने, बच्चे का नाम रखने और उसके सिर के बाल मुंडाने का ज़िक्र हदीस में आया है।
इसी तरह लड़के की तरफ़ से दो और लड़की की तरफ़ से एक जानवर का ज़िक्र भी हदीसों में मिलता है।
इन बातों के अलावा स्थानीय रस्मों या ऐसे तरीकों को सुन्नत नहीं कहना चाहिए जिनके लिए कोई स्पष्ट शरीअती दलील मौजूद न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अक़ीका की दुआ क्या है?
अक़ीका के जानवर को ज़बह करते समय हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायत में ये अल्फ़ाज़ आए हैं:
بِسْمِ اللَّهِ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ لَكَ وَإِلَيْكَ، هَذِهِ عَقِيقَةُ فُلَانٍ
Aqiqah Ki Dua in Hindi क्या है?
बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा लका व इलैक, हाज़िही अकीक़तु फ़ुलान।
अक़ीका की दुआ का तर्जुमा क्या है?
अल्लाह के नाम से, और अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! यह तेरे ही लिए है और तेरी ही तरफ़ है। यह फ़लाँ की तरफ़ से अक़ीका है।
अक़ीका किसके लिए किया जाता है?
अक़ीका नवजात बच्चे की पैदाइश के सिलसिले में किया जाता है। हदीसों में बच्चे की तरफ़ से अक़ीका का ज़िक्र मौजूद है।
लड़के के अक़ीका में कितने जानवर होते हैं?
हदीस में लड़के की तरफ़ से दो जानवरों का ज़िक्र आया है, जबकि लड़की की तरफ़ से एक जानवर का।
अक़ीका कब करना चाहिए?
हदीस में अक़ीका के लिए सातवें दिन का ज़िक्र मिलता है। इसी के साथ बच्चे का नाम रखने और सिर के बाल मुंडाने का भी उल्लेख है।
क्या अक़ीका की यही पूरी दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
नहीं। ऊपर दी गई दुआ रिवायत में आई है, लेकिन पूरी दुआ पढ़ना अक़ीका की वैधता की शर्त नहीं है। ज़बह करते समय अल्लाह का नाम लेना अहम है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Aqiqah Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
अक़ीका के जानवर को ज़बह करते समय हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत किए गए अल्फ़ाज़ में “बिस्मिल्लाह, अल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा लका व इलैक, हाज़िही अकीक़तु फ़ुलान” आता है। इमाम नववी ने इस रिवायत की सनद को हसन कहा है।
अक़ीका के बारे में दूसरी हदीसों में लड़के की तरफ़ से दो और लड़की की तरफ़ से एक जानवर तथा सातवें दिन अक़ीका करने का ज़िक्र भी मिलता है।
इसलिए अक़ीका करते समय सुन्नत से साबित बातों का एहतिमाम करें और ऐसी रस्मों या फ़ज़ीलतों को दीन का हिस्सा न बनाएं जिनके लिए स्पष्ट प्रमाण मौजूद न हो।
अल्लाह तआला हमारे बच्चों को सेहत, सलामती, नेक अख़लाक़ और ईमान की दौलत अता फ़रमाए और तमाम जायज़ अक़ीक़ों को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए। आमीन।
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