Istikhara Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको इस्तिखारा की वह मस्नून दुआ बताएंगे जो रसूलुल्लाह ﷺ ने सहाबा-ए-किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम को सिखाई थी। यह दुआ हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है और सहीह अल-बुख़ारी 1166 में मौजूद है। हदीस में नबी ﷺ ने इस्तिखारा के लिए फ़र्ज़ नमाज़ के अलावा दो रकअत पढ़ने और फिर यह दुआ करने की तालीम दी।
Istikhara Ki Dua in Hindi | इस्तिखारा की दुआ
इस्तिखारा का मतलब है किसी जायज़ मामले में अल्लाह तआला से अपने लिए बेहतर चुनाव और रहनुमाई मांगना। इसमें बंदा अपने सीमित इल्म के बजाय उस रब से भलाई मांगता है जो हर चीज़ के अंजाम को जानता है।
Istikhara Ki Dua in Hindi
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तख़ीरुका बि-इल्मिक, व अस्तक़दिरुका बि-क़ुद्रतिक, व अस्अलुका मिन फ़ज़्लिकल-अज़ीम। फ़इन्नका तक़्दिरु व ला अक़्दिरु, व तअलमु व ला अअलमु, व अन्त अल्लामुल-ग़ुयूब।
अल्लाहुम्मा इन् कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल-अम्रा ख़ैरुल्ली फ़ी दीनि व मआशी व आक़िबति अम्री — या फ़ी आज़िली अम्री व आज़िलिहि — फ़क़्दुरहु ली व यत्तसिरहु ली सुम्मा बारिक ली फ़ीहि। व इन् कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल-अम्रा शर्रुल्ली फ़ी दीनि व मआशी व आक़िबति अम्री — या फ़ी आज़िली अम्री व आज़िलिहि — फ़स्रिफ़हु अन्नी वस्रिफ़नी अन्हु, वक़्दुर लियाल-ख़ैरा हैसु काना सुम्मा अरज़िनी बिहि।
दुआ में “हाज़ल-अम्र” यानी “यह मामला” की जगह उस काम या मामले का ज़िक्र करें जिसके बारे में आप इस्तिखारा कर रहे हैं। हदीस के अंत में अपनी ज़रूरत या मामले को नाम लेकर बताने का ज़िक्र भी मौजूद है।
Istikhara Ki Dua in Arabic
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلَا أَقْدِرُ، وَتَعْلَمُ وَلَا أَعْلَمُ، وَأَنْتَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ.
اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي، أَوْ قَالَ: عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ، فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الْأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي، أَوْ قَالَ: فِي عَاجِلِ أَمْرِي وَآجِلِهِ، فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ، وَاقْدُرْ لِيَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ۔
Istikhara Ki Dua in Roman English
Allahumma inni astakhiruka bi’ilmika, wa astaqdiruka bi-qudratika, wa as’aluka min fadlikal-‘azim. Fa’innaka taqdiru wa la aqdiru, wa ta’lamu wa la a’lamu, wa anta ‘allamul-ghuyub.
Allahumma in kunta ta’lamu anna hadhal-amra khairun li fi dini wa ma’ashi wa ‘aqibati amri — aw qala: ‘ajili amri wa ajilihi — faqdurhu li wa yassirhu li thumma barik li fihi. Wa in kunta ta’lamu anna hadhal-amra sharrun li fi dini wa ma’ashi wa ‘aqibati amri — aw qala: fi ‘ajili amri wa ajilihi — fasrifhu ‘anni wasrifni ‘anhu, waqdur liyal-khaira haisu kana thumma ardini bihi.
इस्तिखारा की दुआ का हिंदी तर्जुमा
ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझसे भलाई का चुनाव मांगता हूं, तेरी कुदरत के ज़रिए ताक़त मांगता हूं और तेरे अज़ीम फ़ज़्ल का सवाल करता हूं। बेशक तू कुदरत रखता है और मैं कुदरत नहीं रखता, तू जानता है और मैं नहीं जानता और तू ही तमाम ग़ैब का जानने वाला है।
ऐ अल्लाह! अगर तेरे इल्म में यह मामला मेरे दीन, मेरी रोज़ी और मेरे अंजाम के लिए बेहतर है—या मेरी मौजूदा और आने वाली ज़िंदगी के लिए बेहतर है—तो इसे मेरे लिए मुक़द्दर कर दे, इसे मेरे लिए आसान कर दे और इसमें मेरे लिए बरकत अता फ़रमा।
और अगर तेरे इल्म में यह मामला मेरे दीन, मेरी रोज़ी और मेरे अंजाम के लिए बुरा है—या मेरी मौजूदा और आने वाली ज़िंदगी के लिए बुरा है—तो इसे मुझसे दूर कर दे और मुझे इससे दूर कर दे। और जहां भी मेरे लिए भलाई हो, उसे मेरे लिए मुक़द्दर कर दे, फिर मुझे उस पर राज़ी कर दे।
इस्तिखारा क्या है?
इस्तिखारा उस वक़्त किया जाता है जब इंसान किसी जायज़ मामले में फैसला करने के लिए अल्लाह तआला से बेहतर रास्ते की दरख़्वास्त करना चाहता है। हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हुमा बताते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ सहाबा को इस्तिखारा ऐसे सिखाते थे जैसे क़ुरआन की सूरत सिखाते थे।
इस्तिखारा में इंसान अल्लाह तआला के सामने यह मानता है कि उसका अपना इल्म और कुदरत सीमित है, जबकि अल्लाह तआला सब कुछ जानता और हर चीज़ पर क़ादिर है।
इस्तिखारा का सही तरीका
सहीह बुख़ारी की हदीस के मुताबिक़, जब किसी मामले का इरादा हो तो फ़र्ज़ नमाज़ के अलावा दो रकअत नफ़्ल नमाज़ पढ़ी जाए और फिर इस्तिखारा की यह दुआ की जाए। दुआ के अंदर जिस मामले के बारे में फैसला चाहिए, उसका ज़िक्र किया जाए।
यानी इस्तिखारा का आसान तरीका यह है:
पहला: फ़र्ज़ के अलावा दो रकअत नफ़्ल पढ़ें।
दूसरा: इस्तिखारा की मस्नून दुआ पढ़ें।
तीसरा: दुआ में अपने मामले का ज़िक्र करें।
चौथा: अल्लाह तआला पर भरोसा रखते हुए उचित जानकारी और मशवरे के बाद फैसला करें।
इस्तिखारा का मतलब यह नहीं कि इंसान अपनी अक़्ल, अनुभव, जानकारी और मशवरा छोड़ दे।
शादी के लिए इस्तिखारा
शादी के लिए भी यही मस्नून इस्तिखारा की दुआ पढ़ी जाती है। अगर किसी रिश्ते के बारे में फैसला करना हो तो इस्तिखारा करते समय उस रिश्ते या निकाह के मामले को “हाज़ल-अम्र” के तहत रखें।
लेकिन शादी जैसे अहम फैसले में केवल इस्तिखारा पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। रिश्ते के दीन, अख़लाक़, स्वभाव, परिवार और दूसरे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी लेना और भरोसेमंद लोगों से मशवरा करना भी ज़रूरी है। इस्तिखारा और मशवरा एक-दूसरे के खिलाफ़ नहीं हैं।
क्या इस्तिखारा के बाद सपना आना ज़रूरी है?
नहीं। इस्तिखारा के बाद सपना देखना इसकी शर्त नहीं है। सहीह हदीस में इस्तिखारा की तालीम देते हुए यह नहीं कहा गया कि व्यक्ति को ज़रूर कोई सपना दिखाई देगा।
कई लोगों में यह बात मशहूर है कि इस्तिखारा के बाद सपना आएगा और उसमें किसी रंग या निशानी से फैसला मालूम होगा, लेकिन इसके लिए कोई स्पष्ट सहीह प्रमाण नहीं मिलता। इस्तिखारा के बाद व्यक्ति मामले की जानकारी, मशवरा और उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए आगे बढ़ता है।
क्या इस्तिखारा के बाद कोई खास निशानी मिलती है?
इस्तिखारा का मक़सद भविष्य की कोई छिपी हुई जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि अल्लाह तआला से अपने लिए बेहतर चीज़ मांगना है।
इसलिए किसी खास सपने, रंग, आवाज़ या अचानक दिखाई देने वाली निशानी को इस्तिखारा का अनिवार्य जवाब समझना सही नहीं है। इंसान को सामान्य साधनों से मामले की जांच करनी चाहिए और फिर अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए।
इस्तिखारा किन मामलों में करें?
इस्तिखारा मुख्यतः उन जायज़ मामलों में किया जाता है जिनमें इंसान के सामने चुनाव या फैसला हो। मसलन शादी, नौकरी, कारोबार, सफ़र या दूसरे जायज़ मामलों में किया जा सकता है।
फ़र्ज़ काम करना है या हराम काम करना है—इनके लिए इस्तिखारा करके यह तय नहीं किया जाता कि उन्हें करना है या नहीं, क्योंकि शरीअत का हुक्म पहले से मालूम है।
क्या इस्तिखारा सिर्फ़ शादी के लिए होता है?
नहीं। इस्तिखारा सिर्फ़ शादी के लिए खास नहीं है। हज़रत जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हुमा की हदीस में “सभी मामलों” में इस्तिखारा सिखाने का ज़िक्र आता है। इसलिए कोई भी जायज़ और महत्वपूर्ण मामला हो, जिसमें सही विकल्प चुनने की ज़रूरत हो, उसमें इस्तिखारा किया जा सकता है।
क्या इस्तिखारा एक ही बार करना चाहिए?
सहीह हदीस में इस्तिखारा को कितनी बार करना है, इसकी कोई निश्चित संख्या नहीं बताई गई। इसलिए तीन दिन या सात दिन करना ही ज़रूरी है ऐसा कहना सही नहीं होगा।
जरूरत महसूस हो तो व्यक्ति इस्तिखारा दोहरा सकता है। इसके लिए कोई निश्चित संख्या सहीह हदीस से तय नहीं है।
इस्तिखारा के बाद क्या करना चाहिए?
इस्तिखारा करने के बाद अपने मामले से जुड़ी आवश्यक जानकारी हासिल करें, भरोसेमंद और समझदार लोगों से मशवरा करें और फिर अल्लाह तआला पर भरोसा रखते हुए फैसला करें।
इस्तिखारा का मतलब यह नहीं कि इंसान हर परिस्थिति में किसी सपने का इंतज़ार करता रहे। बल्कि बंदा अल्लाह तआला से मांगता है कि जो उसके लिए बेहतर हो, उसे आसान कर दिया जाए और जो नुकसानदेह हो, उससे दूर कर दिया जाए। यही इस्तिखारा की दुआ का मूल मज़मून भी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Istikhara Ki Dua in Hindi क्या है?
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तख़ीरुका बि-इल्मिक, व अस्तक़दिरुका बि-क़ुद्रतिक, व अस्अलुका मिन फ़ज़्लिकल-अज़ीम…
यह पूरी दुआ ऊपर हिंदी उच्चारण में दी गई है।
इस्तिखारा की दुआ अरबी में क्या है?
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ، وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ…
इसकी पूरी अरबी दुआ ऊपर दी गई है।
इस्तिखारा की दुआ का मतलब क्या है?
इसमें अल्लाह तआला से उसके इल्म और कुदरत के ज़रिए अपने लिए बेहतर चुनाव की दुआ की जाती है। अगर कोई मामला अच्छा हो तो उसे आसान और बाबरकत करने और अगर उसमें नुकसान हो तो उसे दूर करने की दुआ की जाती है।
क्या शादी के लिए इस्तिखारा किया जा सकता है?
जी हां। शादी एक जायज़ और अहम फैसला है, इसलिए उसके बारे में इस्तिखारा किया जा सकता है। साथ ही रिश्ते की उचित जांच-पड़ताल और मशवरा भी करना चाहिए।
क्या इस्तिखारा के बाद सपना देखना ज़रूरी है?
नहीं। सपना इस्तिखारा की शर्त नहीं है और इसके लिए कोई स्पष्ट सहीह प्रमाण नहीं है।
इस्तिखारा कितनी बार करना चाहिए?
सहीह हदीस में कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई। जरूरत के मुताबिक़ दोहराया जा सकता है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Istikhara Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
इस्तिखारा नबी-ए-करीम ﷺ से साबित एक बेहद खूबसूरत अमल है। इसमें इंसान अपनी सीमित जानकारी और कुदरत को अल्लाह तआला के हवाले करते हुए उससे अपने लिए बेहतर रास्ता मांगता है। सहीह बुख़ारी की रिवायत में दो रकअत नफ़्ल के बाद इस दुआ की तालीम दी गई है।
याद रखें कि इस्तिखारा का मतलब किसी सपने या रहस्यमय निशानी का इंतज़ार करना नहीं है। अपने मामले की जानकारी हासिल करें, उचित लोगों से मशवरा करें, फिर अल्लाह तआला पर भरोसा करके फैसला करें।
अल्लाह तआला हमारे लिए वही फैसला मुक़द्दर फ़रमाए जिसमें हमारे दीन, दुनिया और आख़िरत की भलाई हो, हमें सही चुनाव की तौफ़ीक़ दे और अपने फैसले पर राज़ी रहने वाला बनाए।
आमीन या रब्बुल-आलमीन।