बुखार की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में

Bukhar Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको एक मशहूर दुआ बताएंगे, जो बुखार और दूसरी तकलीफ़ों के सिलसिले में एक रिवायत में बयान हुई है। यहां आपको यह दुआ हिंदी उच्चारण, अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ मिलेगी, ताकि आप इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।

Bukhar Ki Dua in Hindi | बुखार की दुआ

बीमारी के वक़्त इंसान को अल्लाह तआला से शिफ़ा और आफ़ियत की दुआ करनी चाहिए। साथ ही बीमारी की हालत के मुताबिक़ उचित इलाज कराना भी ज़रूरी है।

Bukhar Ki Dua in Hindi

बिस्मिल्लाहिल-कबीर, अऊज़ु बिल्लाहिल-अज़ीमि मिन शर्रि कुल्लि इरक़िन नअ़ारिन, व मिन शर्रि हर्रिन-नार।

Bukhar Ki Dua in Arabic

بِسْمِ اللَّهِ الْكَبِيرِ، أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ مِنْ شَرِّ كُلِّ عِرْقٍ نَعَّارٍ، وَمِنْ شَرِّ حَرِّ النَّارِ

Bukhar Ki Dua in Roman English

Bismillahil-Kabeer, a’udhu billahil-‘Azim min sharri kulli ‘irqin na’aarin, wa min sharri harrin-naar.

बुखार की दुआ का हिंदी तर्जुमा

अल्लाह के बड़े नाम से, मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह मांगता हूं हर भड़कती हुई रग के शर से और आग की तपिश के शर से।

यह दुआ अल्लाह तआला की पनाह मांगने पर आधारित है और इसके अल्फ़ाज़ में बीमारी और तकलीफ़ से निजात की उम्मीद झलकती है।

बुखार की दुआ की हदीस

हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से एक रिवायत में यह दुआ बयान हुई है। जामिअ अत-तिर्मिज़ी में बुखार और दूसरी तकलीफ़ों के सिलसिले में इसे बयान किया गया है:

بِسْمِ اللَّهِ الْكَبِيرِ، أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ مِنْ شَرِّ كُلِّ عِرْقٍ نَعَّارٍ، وَمِنْ شَرِّ حَرِّ النَّارِ

यह रिवायत जामिअ अत-तिर्मिज़ी 2075 और सुनन इब्न माजा 3526 में मिलती है।

हालांकि, इस रिवायत की सनद के बारे में मुहद्दिसीन ने कमजोरी का ज़िक्र किया है। इमाम तिर्मिज़ी ने भी इसके एक रावी की कमजोरी का उल्लेख किया है। इसलिए इस दुआ को सहीह हदीस से निश्चित रूप से साबित दुआ कहना उचित नहीं होगा।

क्या बुखार में यह दुआ पढ़ सकते हैं?

बुखार या किसी दूसरी तकलीफ़ के समय अल्लाह तआला से शिफ़ा की दुआ करना जायज़ और अच्छी बात है। इस रिवायत में भी ऊपर दी गई दुआ का ज़िक्र मिलता है।

हालांकि, इसकी सनद कमजोर होने की वजह से इसे सहीह हदीस के दर्जे में पेश नहीं करना चाहिए। कोई व्यक्ति इसे दुआ के तौर पर पढ़ सकता है और अल्लाह तआला से शिफ़ा मांग सकता है।

साथ ही यह बात भी याद रखें कि दुआ के साथ उचित चिकित्सकीय इलाज कराना भी ज़रूरी है। तेज़ या लगातार बुखार होने पर डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

बुखार में अल्लाह से शिफ़ा की दुआ

बीमारी के दौरान अपने अल्फ़ाज़ में भी अल्लाह तआला से शिफ़ा और आफ़ियत की दुआ की जा सकती है। आप कह सकते हैं:

“ऐ अल्लाह! मुझे कामिल शिफ़ा अता फ़रमा, मेरी तकलीफ़ को दूर फ़रमा और मुझे सेहत व आफ़ियत नसीब फ़रमा।”

दुआ करते समय दिल में अल्लाह तआला पर भरोसा रखें और उसी से मदद मांगें।

इस दुआ का आसान मतलब

इस दुआ को आसान तरीके से समझें:

बिस्मिल्लाहिल-कबीर
अल्लाह के बड़े नाम से।

अऊज़ु बिल्लाहिल-अज़ीम
मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह मांगता हूं।

मिन शर्रि कुल्लि इरक़िन नअ़ारिन
हर भड़कती हुई रग के शर से।

व मिन शर्रि हर्रिन-नार
और आग की तपिश के शर से।

इस तरह दुआ का मतलब समझकर इसे पढ़ना और याद करना आसान हो जाता है।

क्या इस दुआ से बुखार तुरंत ठीक हो जाता है?

किसी दुआ के बारे में यह दावा करना सही नहीं है कि उसे पढ़ते ही बुखार निश्चित रूप से तुरंत खत्म हो जाएगा। शिफ़ा अल्लाह तआला के हाथ में है।

इसलिए दुआ करते हुए अल्लाह तआला से शिफ़ा की उम्मीद रखें और जरूरत के मुताबिक़ डॉक्टर से इलाज भी कराएं। खास तौर पर बच्चों, बुज़ुर्गों या बहुत तेज़ बुखार की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

बुखार की हालत में क्या करना चाहिए?

बुखार के दौरान आराम करें, पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें और अपनी हालत के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर इलाज करें। अगर बुखार बहुत तेज़ हो, लगातार बना रहे या साथ में गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो जल्द चिकित्सकीय मदद लें।

दुआ इंसान के लिए रूहानी सहारा है, जबकि बीमारी के इलाज के लिए चिकित्सकीय देखभाल भी अहम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बुखार की दुआ क्या है?

बुखार और तकलीफ़ के सिलसिले में रिवायत में आने वाली दुआ है:

بِسْمِ اللَّهِ الْكَبِيرِ، أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ مِنْ شَرِّ كُلِّ عِرْقٍ نَعَّارٍ، وَمِنْ شَرِّ حَرِّ النَّارِ

Bukhar Ki Dua in Hindi क्या है?

बिस्मिल्लाहिल-कबीर, अऊज़ु बिल्लाहिल-अज़ीमि मिन शर्रि कुल्लि इरक़िन नअ़ारिन, व मिन शर्रि हर्रिन-नार।

बुखार की दुआ का तर्जुमा क्या है?

अल्लाह के बड़े नाम से, मैं अज़मत वाले अल्लाह की पनाह मांगता हूं हर भड़कती हुई रग के शर से और आग की तपिश के शर से।

बुखार की दुआ किस हदीस में है?

यह दुआ जामिअ अत-तिर्मिज़ी 2075 और सुनन इब्न माजा 3526 की रिवायत में मिलती है।

क्या बुखार की यह दुआ सहीह हदीस से साबित है?

इस रिवायत की सनद में कमजोरी के बारे में मुहद्दिसीन ने चर्चा की है। इमाम तिर्मिज़ी ने भी इसके एक रावी के कमजोर होने का उल्लेख किया है। इसलिए इसे सहीह हदीस कहना उचित नहीं है।

आख़िरी अल्फ़ाज़

उम्मीद है कि अब आपको Bukhar Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।

बीमारी और बुखार के समय अल्लाह तआला से शिफ़ा और आफ़ियत की दुआ करें। ऊपर दी गई दुआ एक रिवायत में बुखार और तकलीफ़ के सिलसिले में बयान हुई है, हालांकि इसकी सनद कमजोर है। इसलिए इसे सहीह हदीस से साबित दुआ के तौर पर पेश करने से बचना चाहिए।

दुआ के साथ उचित इलाज कराना भी ज़रूरी है। अल्लाह तआला ही असल में शिफ़ा देने वाला है, इसलिए उसी से मदद और रहमत की उम्मीद रखें।

अल्लाह तआला तमाम बीमारों को कामिल शिफ़ा, सेहत और आफ़ियत अता फ़रमाए और उनकी हर तकलीफ़ को दूर फ़रमाए। आमीन।

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