Salatul Hajat Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको आसान और साफ़ अल्फ़ाज़ में बताएंगे। यहां आपको सलातुल हाजत से जुड़ी मशहूर दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण, रोमन इंग्लिश और हिंदी तर्जुमा के साथ मिलेगी, ताकि आप इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।
Salatul Hajat Ki Dua in Hindi | सलातुल हाजत की दुआ
सलातुल हाजत का मतलब अपनी किसी जायज़ ज़रूरत के लिए अल्लाह तआला से मदद और दुआ मांगना है। सलातुल हाजत से जुड़ी एक रिवायत जामिअ अत-तिर्मिज़ी 479 और सुनन इब्न माजा 1384 में हज़रत अब्दुल्लाह बिन अबी औफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से मिलती है। इस रिवायत में वुज़ू करके दो रकअत नमाज़ पढ़ने और उसके बाद अल्लाह तआला से दुआ करने का ज़िक्र है।
Salatul Hajat Ki Dua in Hindi
ला इलाहा इल्लल्लाहुल-हलीमुल-करीम, सुब्हानल्लाहि रब्बिल-अर्शिल-अज़ीम, अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल-आलमीन। अस्अलुका मुजिबाति रहमतिक, व अज़ाइम मग़फ़िरतिक, वल-ग़नीमत मिन कुल्लि बिर्रिन, वस्सलामत मिन कुल्लि इस्मिन। ला तदअ ली ज़म्बन इल्ला ग़फ़रतहू, वला हम्मन इल्ला फ़र्रज्तहू, वला हाजतन हिया लक रिदन इल्ला क़ज़ैतहा, या अरहमर-राहिमीन।
Salatul Hajat Ki Dua in Arabic
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ الْحَلِيمُ الْكَرِيمُ، سُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ، أَسْأَلُكَ مُوجِبَاتِ رَحْمَتِكَ، وَعَزَائِمَ مَغْفِرَتِكَ، وَالْغَنِيمَةَ مِنْ كُلِّ بِرٍّ، وَالسَّلَامَةَ مِنْ كُلِّ إِثْمٍ، لَا تَدَعْ لِي ذَنْبًا إِلَّا غَفَرْتَهُ، وَلَا هَمًّا إِلَّا فَرَّجْتَهُ، وَلَا حَاجَةً هِيَ لَكَ رِضًا إِلَّا قَضَيْتَهَا، يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ۔
Salatul Hajat Ki Dua in Roman English
La ilaha illallahul-Halimul-Karim, Subhanallahi Rabbil-‘Arshil-‘Azim, Alhamdu lillahi Rabbil-‘Alamin. As’aluka mujibati rahmatika, wa ‘aza’ima maghfiratika, wal-ghanimata min kulli birrin, was-salamata min kulli ithmin. La tada’ li dhanban illa ghafartahu, wa la hamman illa farrajtahu, wa la hajatan hiya laka ridan illa qadaytaha, ya Arhamar-Rahimin.
Salatul Hajat Ki Dua Ka Hindi Tarjuma
ऐ अल्लाह! तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तू बहुत बुर्दबार और करम करने वाला है। पाक है वह अल्लाह जो अज़ीम अर्श का रब है। तमाम तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहानों का रब है।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी रहमत के उन ज़रियों का सवाल करता हूं और तेरी मग़फ़िरत के उन असबाब का सवाल करता हूं। मैं हर नेकी से हिस्सा पाने और हर गुनाह से सलामती की दुआ करता हूं।
मैं तुझसे मांगता हूं कि मेरा कोई गुनाह ऐसा न रहने दे जिसे तू माफ़ न कर दे, कोई ऐसा ग़म न रहने दे जिसे तू दूर न कर दे, और मेरी कोई ऐसी हाजत जो तेरी रज़ा के मुताबिक़ हो, ऐसी न रहने दे जिसे तू पूरा न कर दे। ऐ सबसे बढ़कर रहम करने वाले!
सलातुल हाजत की हदीस
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अबी औफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने उस शख़्स के बारे में बताया जिसे अल्लाह तआला से कोई ज़रूरत हो। उसे अच्छी तरह वुज़ू करना चाहिए, फिर दो रकअत नमाज़ पढ़नी चाहिए, उसके बाद अल्लाह तआला की हम्द और नबी ﷺ पर सलात पढ़कर दुआ करनी चाहिए। रिवायत में ऊपर दी गई दुआ भी बयान हुई है।
यह रिवायत जामिअ अत-तिर्मिज़ी 479 और सुनन इब्न माजा 1384 में मिलती है।
हालांकि, इस रिवायत की सनद के बारे में मुहद्दिसीन ने कलाम किया है। इसलिए इसे बिल्कुल स्पष्ट तौर पर “सहीह हदीस से साबित सलातुल हाजत की पक्की सुन्नत” कहना उचित नहीं होगा। लेख में इसे मशहूर रिवायत के तौर पर पेश करना अधिक एहतियाती है।
सलातुल हाजत का तरीका
मशहूर रिवायत में जिस तरीके का ज़िक्र आता है, उसके मुताबिक़ अपनी किसी ज़रूरत के लिए अच्छी तरह वुज़ू करके दो रकअत नमाज़ पढ़ी जाती है। इसके बाद अल्लाह तआला की हम्द की जाती है, नबी-ए-करीम ﷺ पर सलात भेजी जाती है और फिर ऊपर दी गई दुआ पढ़कर अपनी जायज़ हाजत के लिए दुआ की जाती है।
यहां एक अहम बात समझना ज़रूरी है कि तीन बार दुरूद पढ़ना, किसी खास संख्या में दुआ दोहराना या नमाज़ के बाद हाथ चूमना इस रिवायत के मूल पाठ में तय नहीं किया गया है। इसलिए इन्हें सलातुल हाजत का अनिवार्य या पक्का तरीका बताना सही नहीं होगा।
सलातुल हाजत की दुआ में क्या मांगें?
इस दुआ में अल्लाह तआला की हम्द करने के साथ उसकी रहमत और मग़फ़िरत मांगी जाती है। इसके अलावा हर नेकी हासिल करने, गुनाहों से सलामती, ग़म दूर होने और ऐसी जायज़ हाजत पूरी होने की दुआ की जाती है जिसमें अल्लाह तआला की रज़ा हो।
आप अपनी जायज़ ज़रूरत भी अल्लाह तआला के सामने साफ़ तौर पर रख सकते हैं। साथ ही अपने वालिदैन, घरवालों और दूसरे मुसलमानों के लिए भी भलाई की दुआ कर सकते हैं।
क्या सलातुल हाजत की दुआ पढ़ने से हर हाजत पूरी हो जाती है?
दुआ अल्लाह तआला से मदद और ज़रूरत मांगने का ज़रिया है, लेकिन किसी दुआ के बारे में यह कहना सही नहीं कि उसे पढ़ते ही हर हाजत निश्चित रूप से उसी तरह पूरी हो जाएगी।
मोमिन को दुआ करते हुए अल्लाह तआला पर भरोसा रखना चाहिए और नतीजा उसी के हवाले करना चाहिए। जो चीज़ इंसान के लिए बेहतर हो, अल्लाह तआला उसके मुताबिक़ फैसला फरमाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सलातुल हाजत की दुआ क्या है?
सलातुल हाजत से जुड़ी मशहूर दुआ की शुरुआत है:
لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ الْحَلِيمُ الْكَرِيمُ
और यह दुआ आगे अल्लाह तआला की हम्द, रहमत, मग़फ़िरत और जायज़ हाजत की दुआ पर مشتمل है।
Salatul Hajat Ki Dua in Hindi क्या है?
ला इलाहा इल्लल्लाहुल-हलीमुल-करीम, सुब्हानल्लाहि रब्बिल-अर्शिल-अज़ीम, अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल-आलमीन…
ऊपर पूरी दुआ हिंदी उच्चारण में दी गई है।
सलातुल हाजत की दुआ का तर्जुमा क्या है?
इसमें अल्लाह तआला की हम्द की जाती है और उसकी रहमत, मग़फ़िरत, हर नेकी में हिस्सा, गुनाहों से सलामती, ग़म से निजात और अपनी जायज़ हाजत पूरी होने की दुआ की जाती है।
सलातुल हाजत की दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ जामिअ अत-तिर्मिज़ी 479 और सुनन इब्न माजा 1384 की रिवायत में मिलती है।
क्या सलातुल हाजत की हदीस सहीह है?
इस रिवायत की सनद के बारे में मुहद्दिसीन के यहां कलाम है। इसलिए इसे बिना किसी तफ़सील के सहीह हदीस कहना उचित नहीं है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Salatul Hajat Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
इस दुआ में अल्लाह तआला की हम्द, उसकी रहमत और मग़फ़िरत की मांग और अपनी जायज़ हाजत के लिए इल्तिजा की गई है। अपनी ज़रूरत के वक़्त अल्लाह तआला की तरफ़ रुजू करना और उससे मदद मांगना मोमिन के लिए उम्मीद और भरोसे का ज़रिया है।
बस यह ध्यान रखें कि सलातुल हाजत से जुड़ी इस खास रिवायत की सेहत के बारे में मुहद्दिसीन ने कलाम किया है। इसलिए इस बारे में ऐसी बात न कही जाए जो हदीस से साबित न हो।
अल्लाह तआला हम सबकी जायज़ हाजात पूरी फ़रमाए, परेशानियों को दूर करे, हमारे गुनाहों को माफ़ फ़रमाए और हमें दुनिया व आख़िरत की भलाई अता फ़रमाए। आमीन।
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