Tahajjud Ki Dua in Hindi के बारे में आज इस लेख में हम आपको एक ऐसी ख़ूबसूरत दुआ बताएंगे जो रसूलुल्लाह ﷺ से रात की नमाज़ में पढ़ना साबित है। यह दुआ अरबी के साथ-साथ हिंदी उच्चारण, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा में यहां दी गई है, ताकि आप इसे आसानी से पढ़ सकें, समझ सकें और याद भी कर सकें।
Tahajjud Ki Dua in Hindi | तहज्जुद की दुआ
हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि जब नबी-ए-करीम ﷺ रात में तहज्जुद के लिए खड़े होते, तो यह दुआ पढ़ते थे। यह रिवायत सहीह अल-बुख़ारी 6317 में मौजूद है। इसी दुआ की रिवायत सहीह अल-बुख़ारी 1120 में भी आई है।
Tahajjud Ki Dua in Hindi
अल्लाहुम्मा लकल-हम्दु, अन्त नूरुस्समावाति वल-अर्ज़ि वमन फ़ीहिन्न, व लकल-हम्दु अन्त क़य्यिमुस्समावाति वल-अर्ज़ि वमन फ़ीहिन्न, व लकल-हम्दु अन्तल-हक़्क़ु, व वअ्दुका हक़्क़ुन, व क़ौलुका हक़्क़ुन, व लिक़ाउका हक़्क़ुन, वल-जन्नतु हक़्क़ुन, वन-नारु हक़्क़ुन, वस्साअतु हक़्क़ुन, वन-नबिय्यूना हक़्क़ुन, व मुहम्मदुन हक़्क़ुन।
अल्लाहुम्मा लका असलम्तु, व अलैका तवक्कल्तु, व बिका आमन्तु, व इलैका अनब्तु, व बिका खासम्तु, व इलैका हाकम्तु। फ़ग़्फ़िर ली मा क़द्दम्तु व मा अख्ख़र्तु, व मा असरर्तु व मा अअ्लन्तु। अन्तल-मुक़द्दिमु व अन्तल-मुअख़्ख़िरु, ला इलाहा इल्ला अन्त।
Tahajjud Ki Dua in Arabic
اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ، أَنْتَ نُورُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ، وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ قَيِّمُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ، وَلَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ الْحَقُّ، وَوَعْدُكَ حَقٌّ، وَقَوْلُكَ حَقٌّ، وَلِقَاؤُكَ حَقٌّ، وَالْجَنَّةُ حَقٌّ، وَالنَّارُ حَقٌّ، وَالسَّاعَةُ حَقٌّ، وَالنَّبِيُّونَ حَقٌّ، وَمُحَمَّدٌ حَقٌّ، اللَّهُمَّ لَكَ أَسْلَمْتُ، وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ، وَبِكَ آمَنْتُ، وَإِلَيْكَ أَنَبْتُ، وَبِكَ خَاصَمْتُ، وَإِلَيْكَ حَاكَمْتُ، فَاغْفِرْ لِي مَا قَدَّمْتُ وَمَا أَخَّرْتُ، وَمَا أَسْرَرْتُ وَمَا أَعْلَنْتُ، أَنْتَ الْمُقَدِّمُ وَأَنْتَ الْمُؤَخِّرُ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ۔
Tahajjud Ki Dua in Roman English
Allahumma lakal-hamdu, anta nurus-samawati wal-ardi wa man fihinna, wa lakal-hamdu anta qayyimus-samawati wal-ardi wa man fihinna, wa lakal-hamdu antal-haqqu, wa wa’duka haqqun, wa qawluka haqqun, wa liqa’uka haqqun, wal-jannatu haqqun, wan-naru haqqun, was-sa’atu haqqun, wan-nabiyyuna haqqun, wa Muhammadun haqqun.
Allahumma laka aslamtu, wa ‘alaika tawakkaltu, wa bika amantu, wa ilaika anabtu, wa bika khasamtu, wa ilaika hakamtu. Faghfir li ma qaddamtu wa ma akhkhartu, wa ma asrartu wa ma a’lantu. Antal-muqaddimu wa antal-mu’akhkhiru, la ilaha illa anta.
तहज्जुद की दुआ का हिंदी तर्जुमा
ऐ अल्लाह! सारी हम्द तेरे ही लिए है। तू आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है, सबका नूर है। सारी हम्द तेरे ही लिए है। तू आसमानों और ज़मीन और जो कुछ उनमें है, सबको क़ायम रखने वाला है। सारी हम्द तेरे ही लिए है। तू ही हक़ है, तेरा वादा हक़ है, तेरा क़ौल हक़ है, तुझसे मुलाक़ात हक़ है, जन्नत हक़ है, जहन्नम हक़ है, क़यामत हक़ है, नबी हक़ हैं और मुहम्मद ﷺ हक़ हैं।
ऐ अल्लाह! मैंने अपने आप को तेरे हवाले किया, तुझ पर भरोसा किया, तुझ पर ईमान लाया, तेरी ही तरफ़ रुजू किया, तेरी मदद से मुक़ाबला किया और तेरी ही तरफ़ फैसला लाया। इसलिए मेरे वे गुनाह माफ़ फ़रमा जो मैंने पहले किए और जो बाद में किए, जो मैंने छिपाकर किए और जो मैंने खुलकर किए। तू ही आगे बढ़ाने वाला है और तू ही पीछे करने वाला है। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।
तहज्जुद की दुआ की हदीस
हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ जब रात में तहज्जुद के लिए खड़े होते, तो यह दुआ पढ़ते थे:
“अल्लाहुम्मा लकल-हम्दु, अन्त नूरुस्समावाति वल-अर्ज़ि वमन फ़ीहिन्न…”
इस रिवायत में नबी ﷺ रात की नमाज़ में अल्लाह तआला की हम्द करते, उसके हक़ होने और उसके वादे के हक़ होने का इकरार करते और फिर अपने पहले व बाद के, छिपे और ज़ाहिर गुनाहों की मग़फ़िरत मांगते थे। यह हदीस सहीह अल-बुख़ारी 6317 में दर्ज है और इसे रात की नमाज़ के संदर्भ में भी रिवायत किया गया है।
तहज्जुद में यह दुआ कब पढ़ें?
इस दुआ के बारे में हदीस में साफ़ तौर पर आता है कि नबी-ए-करीम ﷺ रात में तहज्जुद के लिए खड़े होते समय इसे पढ़ते थे। इसलिए इसे तहज्जुद की नमाज़ के दौरान पढ़ी जाने वाली मस्नून दुआ कहा जा सकता है।
इससे यह ज़रूरी नहीं होता कि तहज्जुद खत्म करने के बाद केवल यही दुआ पढ़ी जाए। नमाज़ के बाद आप अपनी जायज़ जरूरतों के लिए भी अल्लाह तआला से दुआ कर सकते हैं।
तहज्जुद की दुआ का मतलब
यह दुआ अल्लाह तआला की हम्द से शुरू होती है। इसमें उसके नूर, उसकी क़य्यूमियत और उसके हक़ होने का ज़िक्र है। इसके बाद जन्नत, जहन्नम, क़यामत और नबियों की सच्चाई का इकरार किया जाता है।
आख़िर में बंदा अपने ईमान और तवक्कुल का इज़हार करते हुए अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है। वह अपने उन गुनाहों के लिए भी मग़फ़िरत चाहता है जो पहले या बाद में, छिपकर या ज़ाहिर तौर पर हुए हों।
क्या तहज्जुद की दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
तहज्जुद की नमाज़ में यही दुआ पढ़ना फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है। यह नबी ﷺ से साबित दुआ है, इसलिए इसे पढ़ना बहुत अच्छा अमल है। इसके साथ दूसरी मस्नून दुआएँ और अपनी जायज़ ज़रूरतों के लिए दुआ भी की जा सकती है।
तहज्जुद की दुआ कैसे याद करें?
अगर आपको यह दुआ लंबी लगती है तो इसे छोटे-छोटे हिस्सों में याद करें। पहले हम्द वाला हिस्सा याद करें, उसके बाद अल्लाह तआला की सिफ़ात वाला हिस्सा और आखिर में मग़फ़िरत की दुआ वाला हिस्सा याद करें।
अल्लाहुम्मा लकल-हम्दु…
फिर:
अन्तल-हक़्क़ु…
और आखिर में:
फ़ग़्फ़िर ली मा क़द्दम्तु व मा अख्ख़र्तु…
इस तरह इसे धीरे-धीरे पढ़ने और समझने से याद करना आसान हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तहज्जुद की दुआ क्या है?
तहज्जुद की रात की नमाज़ में नबी ﷺ से साबित दुआ में यह दुआ शामिल है:
اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ، أَنْتَ نُورُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ…
Tahajjud Ki Dua in Hindi क्या है?
इसका हिंदी उच्चारण है:
अल्लाहुम्मा लकल-हम्दु, अन्त नूरुस्समावाति वल-अर्ज़ि वमन फ़ीहिन्न…
ऊपर पूरी दुआ हिंदी में दी गई है।
तहज्जुद की दुआ का तर्जुमा क्या है?
इस दुआ में अल्लाह तआला की हम्द, उसके हक़ होने और उसके वादे पर ईमान का इज़हार किया गया है और अपने पहले व बाद के, छिपे और ज़ाहिर गुनाहों की मग़फ़िरत मांगी गई है।
तहज्जुद की यह दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ हज़रत इब्न अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है और सहीह अल-बुख़ारी 6317 तथा सहीह अल-बुख़ारी 1120 में दर्ज है।
क्या यह दुआ नमाज़ के बाद पढ़नी चाहिए?
हदीस के मुताबिक़ नबी ﷺ इसे रात में तहज्जुद के लिए खड़े होते समय पढ़ते थे। इसलिए इसे केवल नमाज़ के बाद की खास दुआ कहना सही नहीं है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Tahajjud Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
यह बहुत ही ख़ूबसूरत मस्नून दुआ है जिसमें अल्लाह तआला की हम्द, उसके वादे पर यक़ीन, ईमान और अपने गुनाहों की मग़फ़िरत की इल्तिजा शामिल है। रात की इबादत में इसे समझकर पढ़ना दिल में अल्लाह तआला की याद और उससे ताल्लुक़ को और मज़बूत कर सकता है।
अल्लाह तआला हमें तहज्जुद और दूसरी तमाम इबादतों की पाबंदी करने, सही तरीके से दुआ मांगने और अपने गुनाहों से सच्ची तौबा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल-आलमीन।
Pingback: सलातुल हाजत की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में - fsahil.com