रमज़ान की मुबारक रातों में शब-ए-क़द्र को बहुत ख़ास मुक़ाम हासिल है। यह वह मुबारक रात है जिसमें मुसलमान ख़ास तौर पर इबादत, ज़िक्र और दुआ का एहतिमाम करते हैं। इसी सिलसिले में आज हम आपको Shab E Qadr Ki Dua in Hindi अरबी, इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ बता रहे हैं।
Shab E Qadr Ki Dua in Hindi | शब-ए-क़द्र की दुआ
शब-ए-क़द्र के बारे में उम्मुल-मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने रसूलुल्लाह ﷺ से पूछा था कि अगर उन्हें शब-ए-क़द्र की रात मिल जाए, तो वह कौन-सी दुआ मांगें। इसके जवाब में नबी-ए-करीम ﷺ ने एक बेहद प्यारी और छोटी दुआ सिखाई।
शब-ए-क़द्र की दुआ हिंदी में
अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल-अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी।
इस दुआ में बंदा अल्लाह तआला से उसकी मग़फ़िरत और माफ़ी की इल्तिजा करता है।
Shab E Qadr Ki Dua in Arabic
اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي
Shab E Qadr Ki Dua in English
Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul-‘afwa fa‘fu ‘anni.
शब-ए-क़द्र की दुआ का हिंदी तर्जुमा
ऐ अल्लाह! बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला है, तू माफ़ी को पसंद करता है, लिहाज़ा मुझे माफ़ फ़रमा।
शब-ए-क़द्र की दुआ की हदीस
उम्मुल-मोमिनीन हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि उन्होंने रसूलुल्लाह ﷺ से अर्ज़ किया:
“या रसूलुल्लाह ﷺ! अगर मुझे मालूम हो जाए कि शब-ए-क़द्र कौन-सी रात है, तो मैं उसमें क्या दुआ मांगूं?”
आप ﷺ ने फ़रमाया:
“अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल-अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी।”
यानी:
“ऐ अल्लाह! बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला है, तू माफ़ी को पसंद करता है, लिहाज़ा मुझे माफ़ फ़रमा।”
यह दुआ हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायत से जामिअ अत-तिर्मिज़ी में दर्ज है। इमाम तिर्मिज़ी ने इस रिवायत को हसन सहीह कहा है। यह रिवायत सुनन इब्न माजा में भी मौजूद है।
शब-ए-क़द्र की दुआ का मतलब
इस छोटी सी दुआ में बहुत गहरा पैग़ाम छिपा हुआ है। इसमें बंदा सबसे पहले अल्लाह तआला की एक महान सिफ़त का ज़िक्र करता है कि वह अफ़ुव्व यानी बहुत माफ़ करने वाला है।
इसके बाद कहा जाता है कि अल्लाह माफ़ी को पसंद करता है और फिर बंदा अपने लिए सीधे माफ़ी की इल्तिजा करता है।
यानी इस दुआ का पूरा मज़मून अल्लाह तआला की रहमत, करम और मग़फ़िरत की उम्मीद पर क़ायम है।
शब-ए-क़द्र में यह दुआ क्यों पढ़ें?
सबसे अहम बात यह है कि शब-ए-क़द्र के बारे में पूछे जाने पर नबी-ए-करीम ﷺ ने हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा को यही दुआ सिखाई। इसलिए शब-ए-क़द्र में इसे पढ़ना सुन्नत से साबित है।
आप इस दुआ को रात में इबादत के दौरान पढ़ सकते हैं और इसके साथ अपनी दूसरी जायज़ हाजात के लिए भी अल्लाह तआला से दुआ कर सकते हैं।
दुआ पढ़ते वक़्त उसके मतलब को समझना और दिल से अल्लाह तआला के सामने अपनी ग़लतियों की माफ़ी मांगना भी अहम है।
शब-ए-क़द्र की दुआ कितनी बार पढ़ें?
हदीस में इस दुआ को पढ़ने की कोई खास तादाद मुक़र्रर नहीं की गई है। इसलिए आप इसे जितनी बार आसानी से पढ़ सकें, पढ़ सकते हैं।
बार-बार पढ़ते हुए दुआ के मतलब पर भी गौर करें:
अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन
ऐ अल्लाह! बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला है।
तुहिब्बुल-अफ़्वा
तू माफ़ी को पसंद करता है।
फ़अफ़ु अन्नी
लिहाज़ा मुझे माफ़ फ़रमा।
इस तरह दुआ को छोटे हिस्सों में याद करना भी आसान हो जाता है।
शब-ए-क़द्र में और कौन-सी दुआ करें?
शब-ए-क़द्र में इस मस्नून दुआ के साथ आप अपने लिए, अपने वालिदैन, घरवालों और तमाम मुसलमानों के लिए नेक और जायज़ दुआएँ भी मांग सकते हैं।
अल्लाह तआला से अपनी मग़फ़िरत, हिदायत, ईमान की मज़बूती, दुनिया और आख़िरत की भलाई तथा नेक ज़िंदगी की दुआ करना मुबारक रातों में एक अच्छा अमल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शब-ए-क़द्र की दुआ क्या है?
اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي
इसका हिंदी उच्चारण है:
अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल-अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी।
Shab E Qadr Ki Dua in Hindi क्या है?
अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल-अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी।
शब-ए-क़द्र की दुआ का तर्जुमा क्या है?
ऐ अल्लाह! बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला है, तू माफ़ी को पसंद करता है, लिहाज़ा मुझे माफ़ फ़रमा।
शब-ए-क़द्र की दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की रिवायत में जामिअ अत-तिर्मिज़ी 3513 में मिलती है। यही दुआ सुनन इब्न माजा 3850 में भी दर्ज है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Shab E Qadr Ki Dua in Hindi अरबी, इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
शब-ए-क़द्र की मुबारक रातों में इस मस्नून दुआ को ज़रूर पढ़ें और अल्लाह तआला से दिल की गहराइयों से मग़फ़िरत की इल्तिजा करें। साथ ही अपने और अपने अज़ीज़ों के लिए नेक और जायज़ दुआएँ भी मांगें।
अल्लाह तआला हम सबकी ख़ताओं को माफ़ फ़रमाए, हमारी दुआओं और इबादतों को क़ुबूल फ़रमाए और हमें शब-ए-क़द्र की बरकतों से भरपूर फ़ायदा उठाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल-आलमीन।