पहले अशरे की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में

रमज़ान का मुक़द्दस महीना रहमत, बरकत और मग़फ़िरत का महीना है। इस महीने में हर मुसलमान की कोशिश होती है कि वह ज़्यादा से ज़्यादा इबादत करे, अपने गुनाहों से तौबा करे और अल्लाह तआला की रहमत व मग़फ़िरत हासिल करे।

Pehle Ashre Ki Dua in Hindi – पहले अशरे की दुआ

आज के इस लेख में हम आपको Pehle Ashre Ki Dua in Hindi अरबी, हिंदी, रोमन इंग्लिश और आसान तर्जुमा के साथ बताएंगे। इस दुआ के ज़रिए हम अपने रब से मग़फ़िरत और रहमत की इल्तिजा करते हैं।

यह खूबसूरत दुआ सूरह अल-मुमिनून, आयत 118 में मौजूद है।

पहले अशरे की दुआ हिंदी में

रब्बिग़फ़िर वरहम वअन्ता ख़ैरुर-राहिमीन।

رَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ

यह बहुत छोटी लेकिन बेहद ख़ूबसूरत दुआ है, जिसमें बंदा अपने रब से माफ़ी और रहमत मांगता है।

Pehle Ashre Ki Dua in Arabic

رَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ

Pehle Ashre Ki Dua in English

Rabbi-ghfir warham wa anta khairur-raahimeen.

पहले अशरे की दुआ का हिंदी तर्जुमा

ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा और मुझ पर रहम फ़रमा, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

पहले अशरे की दुआ का मतलब

इस दुआ में एक मोमिन अपने परवरदिगार के सामने अपनी बेबसी और ज़रूरत का इज़हार करता है। वह अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफ़ी और उसकी रहमत मांगता है।

“रब्बिग़फ़िर” का मतलब है—ऐ मेरे रब, मुझे माफ़ फ़रमा।

“वरहम” का मतलब है—और मुझ पर रहम फ़रमा।

“वअन्ता ख़ैरुर-राहिमीन” का मतलब है—और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

यह दुआ हमें याद दिलाती है कि इंसान को हर हाल में अपने रब की रहमत और मग़फ़िरत का मोहताज रहना चाहिए।

क्या यह रमज़ान के पहले अशरे की खास दुआ है?

रमज़ान को आम तौर पर तीन अशरों में बाँटा जाता है और लोगों में पहले अशरे के लिए इस दुआ को पढ़ने का चलन है। हालांकि, क़ुरआन और सहीह हदीस में रमज़ान के पहले, दूसरे और तीसरे अशरे के लिए अलग-अलग खास दुआएँ तय होने की कोई स्पष्ट प्रामाणिक दलील नहीं मिलती।

इसलिए इसे क़ुरआन में मौजूद एक बहुत प्यारी दुआ के तौर पर पढ़ना बिल्कुल मुनासिब है। रमज़ान हो या आम दिन, मोमिन अल्लाह तआला से मग़फ़िरत, रहमत और अपनी तमाम जायज़ ज़रूरतों के लिए दुआ कर सकता है।

रमज़ान में दुआ की अहमियत

रमज़ान का महीना इबादत और अल्लाह की तरफ़ रुजू करने का बेहतरीन मौक़ा है। इस दौरान रोज़े के साथ नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, ज़िक्र, सदक़ा और दुआ का भी एहतिमाम करना चाहिए।

“रब्बिग़फ़िर वरहम वअन्ता ख़ैरुर-राहिमीन” जैसी क़ुरआनी दुआ को समझकर पढ़ना हमें अपने रब के सामने झुकने और उसकी रहमत की उम्मीद रखने की याद दिलाता है।

पहले अशरे की दुआ कैसे पढ़ें?

आप इस दुआ को आसानी से पढ़ सकते हैं:

रब्बिग़फ़िर वरहम वअन्ता ख़ैरुर-राहिमीन

दुआ पढ़ते वक़्त उसके मतलब को दिल में रखते हुए अल्लाह तआला से अपने गुनाहों की माफ़ी, रहमत और नेक ज़िंदगी की दुआ करें। दुआ में सिर्फ़ अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने वालिदैन, घरवालों, दोस्तों और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए भी ख़ैर मांगना अच्छा अमल है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पहले अशरे की दुआ क्या है?

रमज़ान के पहले अशरे के लिए आम तौर पर पढ़ी जाने वाली दुआ है:

رَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ

जिसका मतलब है: ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा और मुझ पर रहम फ़रमा, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

पहले अशरे की दुआ हिंदी में क्या है?

रब्बिग़फ़िर वरहम वअन्ता ख़ैरुर-राहिमीन।

पहले अशरे की दुआ का तर्जुमा क्या है?

ऐ मेरे रब! मुझे माफ़ फ़रमा और मुझ पर रहम फ़रमा, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

क्या यह दुआ क़ुरआन में है?

जी हाँ। यह दुआ सूरह अल-मुमिनून, आयत 118 में मौजूद है।

आख़िरी बात

उम्मीद है कि अब आपको Pehle Ashre Ki Dua in Hindi अरबी, इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।

रमज़ान का यह मुक़द्दस महीना हमें अपने रब से जुड़ने, गुनाहों से तौबा करने और नेकियों में आगे बढ़ने का मौक़ा देता है। इसलिए इन मुक़द्दस दिनों में खूब दुआ करें और अल्लाह तआला से अपनी मग़फ़िरत व रहमत की इल्तिजा करें।

अगर यह लेख आपको मुफ़ीद लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों और अज़ीज़ों के साथ ज़रूर शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस खूबसूरत क़ुरआनी दुआ को पढ़ सकें और इसके मतलब को समझ सकें।

अल्लाह तआला हम सबके गुनाहों को माफ़ फ़रमाए, हम पर अपनी रहमत नाज़िल फ़रमाए और हमारी तमाम जायज़ दुआओं को क़ुबूल फ़रमाए। आमीन।

2 thoughts on “पहले अशरे की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में”

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