नमाज़ मुकम्मल करने के बाद अल्लाह तआला का ज़िक्र करना और उससे दुआ मांगना बहुत ही खूबसूरत अमल है। नबी ﷺ से फ़र्ज़ नमाज़ के बाद कई अज़कार और दुआएं साबित हैं।
Namaz Ke Baad Ki Dua – नमाज़ के बाद की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में
आज इस लेख में आप Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi, Arabic और English में आसान तरीके से जानेंगे। साथ ही नमाज़ के बाद पढ़े जाने वाले मस्नून अज़कार, तस्बीह और दुआ मांगने के सही तरीके के बारे में भी जानकारी हासिल करेंगे।
अगर आप नमाज़ के बाद की दुआ याद करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए अरबी पाठ, हिंदी उच्चारण और इंग्लिश transliteration को ध्यान से पढ़ें।
Namaz Ke Baad Ki Dua in Arabic
नमाज़ के बाद नबी ﷺ से साबित दुआ यह है:
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
यह दुआ सहीह मुस्लिम में हज़रत सौबान رضي الله عنه से रिवायत है। नबी ﷺ नमाज़ से फ़ारिग़ होने के बाद तीन बार इस्तिग़फार करते और फिर यह दुआ पढ़ते थे।
Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi
अल्लाहुम्म अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलामु, तबारकता या ज़ल-जलालि वल-इकराम।
आसान उच्चारण
अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिंकस्सलाम, तबारकता या ज़ल-जलालि वल-इकराम।
अरबी का सही उच्चारण सीखने के लिए अरबी मूल पाठ को देखकर पढ़ना बेहतर है।
Namaz Ke Baad Ki Dua in English
Allahumma antas-salaam wa minkas-salaam, tabaarakta yaa dhal-jalaali wal-ikraam.
नमाज़ के बाद की दुआ का तर्जुमा
“ऐ अल्लाह! तू ही सलाम है और सलामती तेरी ही तरफ़ से है। ऐ जलाल और इकराम वाले! तू बहुत बरकत वाला है।”
यह छोटी लेकिन बहुत खूबसूरत दुआ है, जिसमें बंदा अल्लाह तआला की सलामती और बरकत का इकरार करता है।
नमाज़ के बाद सबसे पहले क्या पढ़ें?
सहीह मुस्लिम की रिवायत के मुताबिक़ नबी ﷺ नमाज़ से फ़ारिग़ होने के बाद तीन बार “अस्तग़फिरुल्लाह” कहते थे और फिर:
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
पढ़ते थे। Sunnah
इसलिए नमाज़ के बाद आप यह पढ़ सकते हैं:
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ
अस्तग़फिरुल्लाह — 3 बार
फिर:
अल्लाहुम्म अन्तस्सलामु व मिंकस्सलाम, तबारकता या ज़ल-जलालि वल-इकराम।
नमाज़ के बाद कौन-कौन से अज़कार पढ़ें?
फ़र्ज़ नमाज़ के बाद कई मस्नून अज़कार हदीसों से साबित हैं। उनमें से एक मशहूर ज़िक्र यह है कि:
सुब्हानल्लाह — 33 बार
अल्हम्दुलिल्लाह — 33 बार
अल्लाहु अकबर — 33 बार
और 100 पूरा करने के लिए:
لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
पढ़ा जाए।
सहीह मुस्लिम में इस ज़िक्र की फ़ज़ीलत बयान हुई है।
एक दूसरी सहीह रिवायत में 33-33-33 के बाद “अल्लाहु अकबर” 34 बार कहने का भी ज़िक्र आता है। इसलिए नमाज़ के बाद साबित अज़कार के एक से ज्यादा तरीके हैं।
नमाज़ के बाद कौन सी सूरह पढ़ें?
नमाज़ के बाद सूरह इख़लास, सूरह फ़लक और सूरह नास पढ़ना भी हदीस में आया है। हज़रत उक़्बा बिन आमिर رضي الله عنه से रिवायत है कि नबी ﷺ ने उन्हें हर नमाज़ के बाद Mu’awwidhat पढ़ने का हुक्म दिया।
इसलिए नमाज़ के बाद इन सूरहों को पढ़ना अच्छा अमल है।
क्या आयतुल कुर्सी नमाज़ के बाद पढ़ सकते हैं?
आयतुल कुर्सी पढ़ना बहुत फ़ज़ीलत वाला कुरआनी ज़िक्र है और इसे नमाज़ के बाद पढ़ने के बारे में मशहूर रिवायतें मिलती हैं। इसलिए इसे पढ़ना अच्छा अमल है।
लेकिन नमाज़ के बाद के अज़कार की एक ऐसी लंबी सूची बनाकर यह कहना कि “यही पूरा और एकमात्र सही तरीका है”, उचित नहीं है। नबी ﷺ से नमाज़ के बाद कई अलग-अलग अज़कार साबित हैं।
नमाज़ के बाद दुआ कैसे मांगें?
नमाज़ के बाद पहले मस्नून अज़कार पढ़ना एक अच्छा तरीका है। इसके बाद आप अल्लाह तआला से अपनी जायज़ जरूरतों के लिए दुआ कर सकते हैं।
आप अपने लिए, अपने माता-पिता, घरवालों, रिश्तेदारों, दोस्तों और पूरी उम्मत के लिए दुआ कर सकते हैं।
दुआ करते समय अल्लाह से अपने गुनाहों की मग़फिरत, हिदायत, सेहत, हलाल रोज़ी, घर में बरकत, मुश्किलों से निजात और दुनिया व आख़िरत की भलाई मांगें।
आप अपनी भाषा में भी अल्लाह से दुआ कर सकते हैं, क्योंकि अल्लाह दिलों की बात जानता है।
दुआ की शुरुआत कैसे करें?
दुआ करते समय पहले अल्लाह तआला की हम्द और सना करें, फिर नबी ﷺ पर दुरूद भेजें और उसके बाद अपनी जायज़ जरूरतों के लिए दुआ करें।
मसलन आप इस तरह दुआ कर सकते हैं:
“ऐ अल्लाह! हमारी नमाज़ और इबादत को अपनी रहमत से क़ुबूल फ़रमा। हमारे गुनाहों को माफ़ फ़रमा, हमें सीधी राह पर कायम रख और हमें अपनी इताअत करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।”
फिर अपने लिए और अपने घरवालों के लिए अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ दुआ करें।
वालिदैन के लिए दुआ
“ऐ हमारे रब! हमारे मां-बाप पर रहम फ़रमा, उन्हें अपनी हिफाज़त में रख और हमें उनके साथ नेकी करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमा।”
कुरआन में वालिदैन के लिए यह खूबसूरत दुआ भी आई है:
رَبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًا
रब्बिरहम्हुमा कमा रब्बयानी सगीरा।
“ऐ मेरे रब! उन दोनों पर रहम फ़रमा, जैसे उन्होंने बचपन में मेरी परवरिश की।”
दुनिया और आख़िरत के लिए दुआ
कुरआन मजीद में एक बहुत ही मशहूर और जामेअ दुआ है:
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतंव व फ़िल-आख़िरति हसनतंव व क़िना अज़ाबन्नार।
“ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।”
यह दुआ सूरह अल-बक़रह, आयत 201 में मौजूद है।
इसे दुआ में पढ़ना बहुत अच्छा है, लेकिन इसे नमाज़ के बाद “ज़रूर तीन बार” पढ़ना किसी खास मस्नून संख्या के रूप में नहीं कहना चाहिए।
क्या दुआ के बाद हाथों को चूमना चाहिए?
दुआ के बाद हाथों को आंखों या चेहरे पर लगाने अथवा चूमने को नमाज़ के बाद का मस्नून अमल समझना सही नहीं है।
इसी तरह किसी ऐसी खास प्रक्रिया को अनिवार्य न समझें जिसकी कुरआन या सहीह हदीस से स्पष्ट दलील न हो।
दुआ का असल मकसद अल्लाह तआला के सामने अपनी ज़रूरत और बंदगी का इज़हार करना है।
क्या फ़र्ज़ और सुन्नत के बीच लंबी दुआ करनी चाहिए?
अगर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद उसी वक्त सुन्नत नमाज़ पढ़नी हो तो व्यक्ति मस्नून अज़कार पढ़ सकता है और फिर सुन्नत अदा कर सकता है। यह कहना सही नहीं कि दुआ में देर करने से सुन्नत का सवाब निश्चित रूप से कम हो जाता है।
इसलिए नमाज़ के बाद के अज़कार और अगली नमाज़ के वक्त का ख्याल रखते हुए संतुलन रखना चाहिए।
Namaz Ke Baad Ki Dua – FAQs
नमाज़ के बाद कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?
फ़र्ज़ नमाज़ के बाद नबी ﷺ से “अल्लाहुम्म अन्तस्सलामु व मिंकस्सलाम…” पढ़ना साबित है। इससे पहले तीन बार “अस्तग़फिरुल्लाह” कहना भी सहीह हदीस में आया है।
नमाज़ के बाद कितनी बार अस्तग़फिरुल्लाह पढ़ना चाहिए?
नबी ﷺ से नमाज़ के बाद तीन बार “अस्तग़फिरुल्लाह” कहना साबित है।
क्या नमाज़ के बाद 33 बार सुब्हानल्लाह पढ़ना चाहिए?
जी हाँ, 33 बार सुब्हानल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और 33 बार अल्लाहु अकबर पढ़ने की सहीह हदीस मौजूद है। 100 पूरा करने के लिए तौहीद का ज़िक्र पढ़ा जाता है।
क्या नमाज़ के बाद दुआ मांग सकते हैं?
जी हाँ। नमाज़ के बाद अल्लाह तआला से अपनी जायज़ जरूरतों के लिए दुआ करना बिल्कुल जायज़ है। मस्नून अज़कार पढ़ना भी चाहिए।
क्या नमाज़ के बाद दुरूद पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, दुरूद शरीफ पढ़ना नेक अमल है और दुआ से पहले अल्लाह की हम्द और नबी ﷺ पर दुरूद भेजना दुआ के आदाब में शामिल है।
क्या “रब्बना आतिना…” नमाज़ के बाद पढ़ सकते हैं?
जी हाँ। यह कुरआन की दुआ है और दुनिया व आख़िरत की भलाई मांगने वाली बहुत जामेअ दुआ है।
अंतिम लफ़्ज़
उम्मीद है कि अब आपको Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi, Arabic और English आसानी से समझ आ गई होगी। नमाज़ के बाद सबसे पहले नबी ﷺ से साबित अज़कार को अपनाना बेहतर है—तीन बार अस्तग़फिरुल्लाह, फिर “अल्लाहुम्म अन्तस्सलामु व मिंकस्सलाम…” और इसके बाद दूसरे मस्नून अज़कार पढ़े जा सकते हैं। Sunnah+1
इसके बाद आप अल्लाह तआला से अपने लिए, अपने वालिदैन, घरवालों और पूरी उम्मत के लिए जायज़ दुआ कर सकते हैं। दुनिया और आख़िरत की भलाई के लिए “रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतंव…” भी पढ़ सकते हैं।
अल्लाह तआला हमारी नमाज़ों, दुआओं और तमाम नेक आमाल को अपनी बारगाह में क़ुबूल फ़रमाए, हमारे गुनाहों को माफ़ फ़रमाए और हमें दुनिया व आख़िरत की भलाई अता फ़रमाए। आमीन।
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