इस्लाम में खाने-पीने जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों के भी आदाब और सुन्नतें बताई गई हैं। पानी पीने से पहले अल्लाह का नाम लेना यानी “बिस्मिल्लाह” कहना, दाहिने हाथ से पानी पीना और पानी पीने के बाद अल्लाह की हम्द करना इस्लामी आदाब में शामिल है। पानी को एक ही सांस में पीने के बजाय ठहर-ठहरकर पीने का भी ज़िक्र सहीह हदीसों में मिलता है।
Pani Peene Ki Dua – पानी पीने की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में
आज इस लेख में आप Pani Peene Ki Dua in Hindi, Arabic और English में आसानी से पढ़ेंगे। साथ ही पानी पीने की सुन्नतें, सही तरीका और कुरआन व सहीह हदीसों की रोशनी में इससे जुड़े जरूरी आदाब भी जानेंगे।
जरूरी बात: पानी पीने के लिए कोई अलग लंबी “खास दुआ” सहीह हदीस में निर्धारित नहीं है। पानी पीते समय “बिस्मिल्लाह” कहना अल्लाह का नाम लेने के तौर पर हदीस में आया है।
Pani Peene Ki Dua in Arabic
بِسْمِ اللّٰهِ
Pani Peene Ki Dua in Hindi
बिस्मिल्लाह
Pani Peene Ki Dua in English
Bismillah
बिस्मिल्लाह का मतलब
“अल्लाह के नाम से।”
पानी पीने के लिए “बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” कहना भी अल्लाह के नाम से शुरुआत करना है, लेकिन पानी पीने के लिए सहीह हदीस में खास तौर पर “बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम” के पूरे शब्द निर्धारित नहीं किए गए हैं। इसलिए इस लेख में मस्नून आदाब के लिहाज़ से “बिस्मिल्लाह” को प्राथमिकता दी गई है।
पानी पीने के बाद क्या पढ़ें?
पानी पीने के बाद अल्लाह तआला की हम्द यानी:
الْحَمْدُ لِلّٰهِ
अल्हम्दुलिल्लाह
कहना चाहिए।
पानी पीने के बारे में रिवायत में अल्लाह का नाम लेते हुए पीने और पीने के बाद उसकी हम्द करने का ज़िक्र मिलता है।
इसके अलावा सहीह मुस्लिम में है कि अल्लाह उस बंदे से राज़ी होता है जो खाना खाने या पानी पीने के बाद अल्लाह की हम्द करता है।
पानी पीने की सुन्नतें और आदाब
पानी पीते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- पानी पीने से पहले बिस्मिल्लाह कहें।
- पानी दाहिने हाथ से पिएं। सहीह मुस्लिम में खाने और पीने के लिए दाहिने हाथ का इस्तेमाल करने की हिदायत आई है।
- पानी को जल्दबाजी में एक ही सांस में पीने के बजाय दो या तीन घूंट में पीना बेहतर है।
- पानी पीते समय बर्तन के अंदर सांस न लें।
- सांस लेने के लिए बर्तन को मुंह से हटा लें।
- पानी पीने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहें।
- सोने और चांदी के बर्तनों में पानी न पिएं। नबी ﷺ ने सोने और चांदी के बर्तनों में पीने से मना फरमाया है।
- पानी को बेवजह बर्बाद न करें।
पानी कितनी सांस में पीना चाहिए?
सहीह मुस्लिम की हदीस में हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ पेय को तीन बार सांस लेकर पीते थे और बर्तन के बाहर सांस लेते थे। इसी रिवायत में इसे अधिक प्यास बुझाने वाला, स्वास्थ्यकर और अधिक सुखद बताया गया है।
इसलिए पानी पीते समय लगातार एक ही सांस में पूरा पानी पीने के बजाय रुककर पीना बेहतर है।
क्या तीन घूंट में पानी पीना जरूरी है?
इसे इस तरह समझना चाहिए कि तीन घूंट या तीन बार सांस लेकर पीना सुन्नत से साबित तरीका है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए हर बार ठीक तीन घूंट लेना अनिवार्य नहीं है।
मुख्य बात यह है कि पानी पीते समय बर्तन में सांस न ली जाए और आराम से पानी पिया जाए।
क्या पानी खड़े होकर पी सकते हैं?
पानी पीने के बारे में बैठकर पीने की हिदायत वाली सहीह रिवायतें मौजूद हैं। सहीह मुस्लिम में नबी ﷺ के खड़े होकर पीने से मना करने की रिवायत भी है।
लेकिन दूसरी ओर ज़मज़म का पानी नबी ﷺ ने खड़े होकर भी पिया, जैसा कि सहीह मुस्लिम और सहीह बुखारी में हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर परिस्थिति में खड़े होकर पानी पीना हराम है। इस विषय में अलग-अलग सहीह रिवायतें मौजूद हैं और ज़मज़म को खड़े होकर पीने की स्पष्ट मिसाल भी मिलती है।
पानी पीने के बारे में हदीस
हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से पानी पीने के बारे में एक रिवायत तिर्मिज़ी में भी आई है, जिसमें एक ही बार में पानी पीने के बजाय दो या तीन बार पीने और अल्लाह का नाम लेने तथा बाद में उसकी हम्द करने का ज़िक्र है। हालांकि उस रिवायत की sanad पर हदीस के दर्जे के संबंध में चर्चा है, इसलिए यहां पानी को तीन बार सांस लेकर पीने के लिए सहीह मुस्लिम की रिवायत को प्राथमिक प्रमाण बनाया गया है।
पानी पीने के बाद अल्लाह का शुक्र
पानी अल्लाह तआला की बड़ी नेमत है। इसलिए पानी पीने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहना अल्लाह का शुक्र अदा करने का खूबसूरत तरीका है।
सहीह मुस्लिम की रिवायत के अनुसार, अल्लाह उस बंदे से राज़ी होता है जो खाना खाने या पानी पीने के बाद उसकी हम्द करता है।
इसलिए पानी पीने के बाद दिल से कहें:
الْحَمْدُ لِلّٰهِ
अल्हम्दुलिल्लाह।
पानी की बर्बादी से बचें
कुरआन मजीद में अल्लाह तआला फरमाता है कि खाओ और पियो, लेकिन हद से न बढ़ो, क्योंकि अल्लाह हद से बढ़ने वालों को पसंद नहीं करता। (सूरह अल-आराफ़, 7:31) Quran
इसलिए पानी जैसी नेमत को बेवजह बहाना या बर्बाद करना उचित नहीं है। जरूरत के मुताबिक पानी इस्तेमाल करना चाहिए और अल्लाह की नेमत की कद्र करनी चाहिए।
पानी पीने की दुआ के बारे में जरूरी बात
इंटरनेट पर पानी पीने की दुआ के नाम से अलग-अलग लंबे वज़ीफ़े और दुआएं मिलती हैं। लेकिन हर ऐसी दुआ को रसूलुल्लाह ﷺ से साबित दुआ कहना सही नहीं है।
पानी पीते समय अल्लाह का नाम लेने के लिए “बिस्मिल्लाह” कहना पर्याप्त है। पानी पीने के बाद “अल्हम्दुलिल्लाह” कहना भी हदीस की रिवायतों से समर्थित है।
इसलिए धार्मिक लेख लिखते समय केवल वही बात नबी ﷺ की तरफ मंसूब करनी चाहिए जो विश्वसनीय हदीस से साबित हो।
Pani Peene Ki Dua – FAQs
पानी पीने से पहले कौन सी दुआ पढ़ें?
पानी पीने से पहले “बिस्मिल्लाह” कहें। पानी पीने के लिए किसी अलग लंबी दुआ को मस्नून और अनिवार्य समझना सही नहीं है।
पानी पीने के बाद क्या पढ़ें?
पानी पीने के बाद “अल्हम्दुलिल्लाह” कहना चाहिए।
क्या पानी तीन घूंट में पीना सुन्नत है?
सहीह मुस्लिम में नबी ﷺ के पेय को तीन बार सांस लेकर पीने की रिवायत मिलती है। इसलिए पानी को ठहर-ठहरकर पीना सुन्नत से साबित तरीका है।
क्या पानी दाहिने हाथ से पीना चाहिए?
जी हाँ। सहीह मुस्लिम में नबी ﷺ ने दाहिने हाथ से पीने की हिदायत दी है।
क्या सोने या चांदी के बर्तन में पानी पी सकते हैं?
नहीं। सहीह बुखारी में सोने और चांदी के बर्तनों में पीने से मना किया गया है।
क्या खड़े होकर पानी पीना जायज़ है?
इस विषय में अलग-अलग सहीह रिवायतें मौजूद हैं। सामान्य रूप से खड़े होकर पीने से मना करने की रिवायतें हैं, जबकि नबी ﷺ से ज़मज़म का पानी खड़े होकर पीना भी सहीह हदीस से साबित है।
अंतिम लफ़्ज़
उम्मीद है कि अब आप Pani Peene Ki Dua in Hindi, Arabic और English आसानी से समझ गए होंगे। पानी पीने से पहले बिस्मिल्लाह कहना, दाहिने हाथ से पानी पीना, पानी को ठहर-ठहरकर पीना और पीने के बाद अल्हम्दुलिल्लाह कहना इस्लामी आदाब में शामिल है।
साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि पानी अल्लाह तआला की नेमत है। इसलिए इसे बर्बाद करने से बचना चाहिए और कुरआन की हिदायत के मुताबिक खाने-पीने में हद से नहीं बढ़ना चाहिए।
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