आज इस लेख में हम आपको Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi के बारे में बताएंगे। यहां मस्जिद में दाख़िल होते समय पढ़ी जाने वाली दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ दी गई है, ताकि आप इसे आसानी से पढ़, समझ और याद कर सकें।
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi | मस्जिद में दाखिल होने की दुआ
मस्जिद अल्लाह तआला की इबादत की जगह है। इसमें दाख़िल होते समय अदब व एहतराम का ख़याल रखना चाहिए। रसूलुल्लाह ﷺ से मस्जिद में दाख़िल होते समय अल्लाह तआला से उसकी रहमत मांगने की दुआ सहीह हदीस में साबित है।
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi
अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिक।
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Arabic
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Roman English
Allahumma iftah li abwaba rahmatika.
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ का हिंदी तर्जुमा
ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।
यह छोटी सी दुआ बहुत खूबसूरत मतलब रखती है। बंदा मस्जिद में दाख़िल होते हुए अल्लाह तआला से उसकी रहमत का सवाल करता है।
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ की हदीस
रसूलुल्लाह ﷺ से मस्जिद में दाख़िल होते और मस्जिद से निकलते समय दुआ पढ़ना रिवायत हुआ है।
मस्जिद में दाख़िल होते समय पढ़ें:
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
और मस्जिद से निकलते समय पढ़ें:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
यानी:
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूं।
यह दोनों दुआएँ सहीह मुस्लिम 713a में रिवायत हुई हैं।
मस्जिद में दाखिल होने का सही तरीका
मस्जिद में जाते समय सुकून और अदब का ख़याल रखें और अल्लाह तआला को याद करते हुए दाख़िल हों। दाख़िल होते समय ऊपर दी गई मस्नून दुआ पढ़ सकते हैं।
मस्जिद में पहुंचने के बाद अगर बैठना हो तो बैठने से पहले तहिय्यतुल-मस्जिद की दो रकअत पढ़ना नबी ﷺ से साबित है। सहीह अल-बुख़ारी में रसूलुल्लाह ﷺ ने मस्जिद में दाख़िल होने वाले व्यक्ति को बैठने से पहले दो रकअत पढ़ने का हुक्म दिया है।
अगर जमाअत शुरू हो चुकी हो तो नमाज़ में शामिल होना चाहिए। ऐसी स्थिति में अलग से तहिय्यतुल-मस्जिद के लिए इंतज़ार करने के बजाय जमाअत में शामिल होना बेहतर है।
क्या मस्जिद में दाखिल होते समय दायां पैर पहले रखना चाहिए?
मस्जिद में दायां पैर पहले रखने की बात मुसलमानों में बहुत मशहूर है और कई उलमा इसे मस्जिद के अदब में शामिल करते हैं। हालांकि, मस्जिद में दाख़िल होने की ऊपर दी गई सहीह मुस्लिम की हदीस में दाएं पैर का विशेष रूप से ज़िक्र नहीं है।
इसलिए इसे इस दुआ की हदीस का हिस्सा नहीं कहना चाहिए।
मस्जिद में सलाम करने का तरीका
मस्जिद में मुसलमानों को सलाम करना आम इस्लामी तहज़ीब का हिस्सा है। लेकिन अगर कोई नमाज़, तिलावत या ज़िक्र में मशगूल हो तो उसे परेशान करने से बचना चाहिए।
किसी खास जुमले को मस्जिद में दाख़िल होने की निश्चित मस्नून सलाम की दुआ कहना उचित नहीं है, जब तक उसके लिए स्पष्ट प्रमाण मौजूद न हो।
मस्जिद से निकलने की दुआ
जिस तरह मस्जिद में दाख़िल होते समय अल्लाह तआला से उसकी रहमत मांगते हैं, उसी तरह मस्जिद से निकलते समय उसके फ़ज़्ल का सवाल किया जाता है।
Arabic
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
Hindi
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फ़ज़्लिक।
हिंदी तर्जुमा
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूं।
यह दुआ भी सहीह मुस्लिम में रिवायत हुई है।
तहिय्यतुल-मस्जिद क्या है?
तहिय्यतुल-मस्जिद दो रकअत नमाज़ है जिसे मस्जिद में दाख़िल होने के बाद, बैठने से पहले पढ़ना नबी ﷺ से साबित है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि जब कोई व्यक्ति मस्जिद में दाख़िल हो तो बैठने से पहले दो रकअत पढ़े। इसलिए सामान्य स्थिति में मस्जिद में दाख़िल होकर बैठने से पहले तहिय्यतुल-मस्जिद पढ़ना चाहिए।
हालांकि, फ़िक़्ही मसाइल में कुछ हालात और विवरण अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी खास स्थिति में अपने भरोसेमंद आलिम से मसला पूछना बेहतर है।
मस्जिद में दाखिल होते समय किन बातों का ख़याल रखें?
मस्जिद में दाख़िल होते समय पाकीज़गी, सुकून और अदब का ख़याल रखना चाहिए। लोगों की नमाज़ में खलल न डालें, ऊंची आवाज़ में बातचीत से बचें और मस्जिद की सफ़ाई का एहतिमाम करें।
जूते-चप्पल उसी जगह रखें जो मस्जिद के इंतज़ाम के मुताबिक़ निर्धारित हो। इस्लाम में मस्जिद की पाकीज़गी और वहां इबादत करने वालों के सुकून का ख्याल रखना अहम है।
क्या मस्जिद में दाखिल होने की दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
यह दुआ नबी ﷺ से सहीह हदीस में साबित है और इसे पढ़ना मस्नून है। लेकिन इसे फ़र्ज़ या वाजिब कहना सही नहीं होगा।
अगर कोई व्यक्ति दुआ पढ़ना भूल जाए तो उसे इस वजह से गुनहगार ठहराना उचित नहीं है। हालांकि, मस्नून अमल को याद रखकर उसकी पाबंदी करना बेहतर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ क्या है?
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
हिंदी में:
अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिक।
Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi क्या है?
अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिक।
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ का तर्जुमा क्या है?
ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।
मस्जिद में दाखिल होने की दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ सहीह मुस्लिम 713a में रिवायत हुई है।
मस्जिद से निकलने की दुआ क्या है?
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अर्थ:
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूं।
मस्जिद में दाखिल होने के बाद कौन-सी नमाज़ पढ़ें?
अगर बैठने का इरादा हो तो सामान्य स्थिति में दो रकअत तहिय्यतुल-मस्जिद पढ़ना नबी ﷺ से साबित है।
आख़िरी अल्फ़ाज़
उम्मीद है कि अब आपको Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi अरबी, रोमन इंग्लिश और आसान हिंदी तर्जुमा के साथ अच्छी तरह समझ आ गई होगी।
मस्जिद में दाख़िल होते समय यह दुआ पढ़ें:
अल्लाहुम्मफ़्तह ली अबवाबा रहमतिक।
यानी:
ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।
और मस्जिद से निकलते समय पढ़ें:
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका मिन फ़ज़्लिक।
यानी:
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फ़ज़्ल का सवाल करता हूं।
दोनों दुआएँ सहीह हदीस में रिवायत हुई हैं। मस्जिद में दाख़िल होकर बैठने से पहले दो रकअत तहिय्यतुल-मस्जिद पढ़ना भी नबी ﷺ से साबित है।
अल्लाह तआला हमें अपनी मस्जिदों का अदब करने, वहां दिल से इबादत करने और अपनी रहमत व फ़ज़्ल हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन।
Pingback: अक़ीका की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में - fsahil.com