रमज़ान-उल-मुबारक में पढ़ी जाने वाली तरावीह की नमाज़ बहुत ही अहम इबादत है। इस दौरान मुसलमान अल्लाह तआला की इबादत, कुरआन की तिलावत और दुआ में अपना वक्त गुज़ारते हैं।
Taraweeh Ki Dua – तरावीह की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में
बहुत से लोग तरावीह के दौरान पढ़ी जाने वाली मशहूर दुआ “सुब्हान ज़िल-मुल्कि वल-मलकूत…” को Taraweeh Ki Dua के नाम से जानते हैं। इसलिए आज इस लेख में हम इस दुआ को हिंदी, अरबी और इंग्लिश में आसान तरीके से जानेंगे, साथ ही इसका तर्जुमा और तरावीह की नमाज़ से जुड़ी जरूरी जानकारी भी समझेंगे।
Taraweeh Ki Dua in Hindi
सुब्हान ज़िल-मुल्कि वल-मलकूत। सुब्हान ज़िल-इज़्ज़ति वल-अज़मति वल-हैबति वल-क़ुदरति वल-किबरियाइ वल-जबरूत। सुब्हानल-मलिकिल-हय्यिल्लज़ी ला यनामु वला यमूतु। सुब्बूहुन क़ुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल-मलाइकि वर-रूह। अल्लाहुम्म अजिरना मिनन-नार। या मुजीरु, या मुजीरु, या मुजीरु, बिरहमतिका या अरहमर-राहिमीन।
नोट: हिंदी में अरबी के उच्चारण को लिखने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। बेहतर है कि अरबी मूल पाठ देखकर उच्चारण सीखा जाए।
Taraweeh Ki Dua in Arabic
سُبْحَانَ ذِي الْمُلْكِ وَالْمَلَكُوتِ، سُبْحَانَ ذِي الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْجَبَرُوتِ، سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْحَيِّ الَّذِي لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوتُ، سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ، اللَّهُمَّ أَجِرْنَا مِنَ النَّارِ، يَا مُجِيرُ يَا مُجِيرُ يَا مُجِيرُ بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ۔
Taraweeh Ki Dua in English
Subhaana dhil-mulki wal-malakoot. Subhaana dhil-izzati wal-azmati wal-haybati wal-qudrati wal-kibriyaa’i wal-jabroot. Subhaanal-Malikil-Hayyillazee laa yanaamu wa laa yamoot. Subboohun Quddoosun Rabbunaa wa Rabbul-malaa’ikati war-rooh. Allahumma ajirnaa minan-naar. Yaa Mujeeru, Yaa Mujeeru, Yaa Mujeeru, bi-rahmatika yaa Arhamar-Raahimeen.
Taraweeh Ki Dua Ka Tarjuma
इस दुआ का आसान हिंदी-उर्दू तर्जुमा है:
“पाक है वह जो मुल्क और मलकूत का मालिक है। पाक है वह जो इज़्ज़त, अज़मत, हैबत, कुदरत, बड़ाई और जबरूत वाला है। पाक है वह बादशाह जो ज़िंदा है, जो न सोता है और न मरता है। वह बहुत पाक और मुक़द्दस है, हमारा रब और फ़रिश्तों और रूह का रब है। ऐ अल्लाह! हमें जहन्नम की आग से बचा। ऐ पनाह देने वाले, ऐ पनाह देने वाले, ऐ पनाह देने वाले! अपनी रहमत से हम पर रहम फ़रमा, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।”
क्या यह तरावीह की मस्नून दुआ है?
यह बात समझना बहुत ज़रूरी है कि “सुब्हान ज़िल-मुल्कि वल-मलकूत…” हमारे समाज में तरावीह की दुआ के नाम से बहुत मशहूर है, लेकिन इसे हर चार रकअत के बाद पढ़ने की खास मस्नून दुआ के तौर पर नबी ﷺ से सहीह हदीस में साबित नहीं किया गया है।
इसलिए इसे पढ़ने वाला इसे आम दुआ और ज़िक्र के तौर पर पढ़ सकता है, लेकिन यह समझना सही नहीं कि तरावीह की नमाज़ में हर चार रकअत के बाद इसी दुआ को पढ़ना जरूरी या सुन्नत है।
दीन के किसी अमल को नबी ﷺ की खास सुन्नत कहने के लिए सहीह दलील होना जरूरी है।
तरावीह की नमाज़ कैसे पढ़ी जाती है?
तरावीह रमज़ान की रातों में पढ़ी जाने वाली क़ियाम की नमाज़ है। नबी ﷺ ने रात की नमाज़ के बारे में फरमाया कि वह दो-दो रकअत करके पढ़ी जाए।
इसलिए तरावीह की नमाज़ आम तौर पर दो-दो रकअत करके सलाम के साथ अदा की जाती है। इसके बाद वित्र की नमाज़ पढ़ी जाती है।
तरावीह के बीच आराम के दौरान कोई शख्स दुआ, ज़िक्र या इस्तिग़फार कर सकता है, लेकिन किसी एक खास दुआ को हर बार पढ़ना जरूरी नहीं है।
क्या हर चार रकअत के बाद यही दुआ पढ़नी चाहिए?
नहीं, इसे जरूरी नहीं समझना चाहिए।
बहुत सी जगहों पर चार रकअत पूरी होने के बाद “सुब्हान ज़िल-मुल्कि वल-मलकूत…” पढ़ने का रिवाज है। लेकिन इस दुआ को हर चार रकअत के बाद पढ़ने की खास सुन्नत सहीह हदीस से साबित नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति इसे दुआ और ज़िक्र के तौर पर पढ़ता है तो अलग बात है, लेकिन इसे तरावीह की नमाज़ का अनिवार्य हिस्सा समझना सही नहीं।
क्या तरावीह 20 रकअत होती है?
20 रकअत तरावीह पढ़ने का अमल बहुत से मुसलमानों और मसाजिद में मशहूर है और इसके समर्थन में सहाबा के अमल की रिवायतें मिलती हैं।
हालांकि तरावीह की रकअतों की संख्या के मसले में उलेमा के बीच इख़्तिलाफ़ पाया जाता है। इसलिए इस मसले को लेकर मुसलमानों के बीच बेवजह झगड़ा नहीं करना चाहिए।
नबी ﷺ से रात की नमाज़ के बारे में दो-दो रकअत पढ़ने की हिदायत साबित है। इसलिए तरावीह को दो-दो रकअत करके पढ़ना रात की नमाज़ के तरीके के मुताबिक़ है।
तरावीह में दुआ कब करें?
तरावीह के दौरान दुआ करने के लिए किसी एक खास समय या खास दुआ को अनिवार्य नहीं किया गया है।
नमाज़ में जहां दुआ का मौका हो वहां मस्नून दुआएं पढ़ी जा सकती हैं। इसके अलावा तरावीह के बाद भी अल्लाह तआला से अपने लिए, अपने घरवालों के लिए और पूरी उम्मत के लिए दुआ की जा सकती है।
रमज़ान दुआ, तौबा और अल्लाह की रहमत हासिल करने का बहुत मुबारक महीना है, इसलिए इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत और दुआ की कोशिश करनी चाहिए।
वित्र के बाद पढ़ा जाने वाला ज़िक्र
तरावीह के बाद जब वित्र की नमाज़ अदा की जाए तो वित्र के बाद “सुब्हानल-मलिकिल-क़ुद्दूस” कहना हदीस से रिवायत हुआ है।
यह ज़िक्र वित्र के बाद से संबंधित है। इसे तरावीह की हर चार रकअत के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ समझना सही नहीं है।
Taraweeh Ki Dua से जुड़े सवाल
तरावीह की दुआ कौन सी है?
“सुब्हान ज़िल-मुल्कि वल-मलकूत…” एक मशहूर दुआ है जिसे आम तौर पर Taraweeh Ki Dua कहा जाता है। लेकिन इसे हर चार रकअत के बाद की खास मस्नून दुआ नहीं समझना चाहिए।
क्या हर चार रकअत के बाद तरावीह की दुआ पढ़ना जरूरी है?
नहीं। हर चार रकअत के बाद इस खास दुआ को पढ़ना जरूरी नहीं है और न ही इसे तरावीह की निश्चित सुन्नत समझना चाहिए।
क्या तरावीह 20 रकअत पढ़ना जरूरी है?
20 रकअत पढ़ने का अमल सहाबा से रिवायत हुआ है और बहुत से मुसलमान इसे अदा करते हैं। लेकिन रकअतों की संख्या के मसले में उलेमा के बीच इख़्तिलाफ़ है। इसलिए दूसरे जायज़ अमल करने वालों को गलत ठहराना उचित नहीं।
तरावीह कितनी-कितनी रकअत पढ़ी जाती है?
रात की नमाज़ के बारे में नबी ﷺ से दो-दो रकअत करके पढ़ने की हिदायत मिलती है। तरावीह भी रात की नमाज़ में शामिल है और आम तौर पर दो-दो रकअत करके अदा की जाती है।
क्या तरावीह के बीच में दुआ कर सकते हैं?
जी हाँ, दुआ करना जायज़ है। लेकिन किसी एक खास दुआ को हर चार रकअत के बाद पढ़ने को नबी ﷺ की निश्चित सुन्नत नहीं समझना चाहिए।
अंतिम लफ़्ज़
उम्मीद है कि अब आप Taraweeh Ki Dua in Hindi, Arabic और English के साथ-साथ इसका आसान तर्जुमा और तरावीह की नमाज़ से जुड़ी जरूरी बातें भी समझ गए होंगे।
“सुब्हान ज़िल-मुल्कि वल-मलकूत…” एक मशहूर दुआ है, लेकिन इसे हर चार रकअत के बाद पढ़ना नबी ﷺ से साबित खास सुन्नत नहीं है। इसलिए दुआ को आम ज़िक्र के तौर पर पढ़ें, मगर इसे तरावीह की नमाज़ का जरूरी हिस्सा न समझें।
रमज़ान-उल-मुबारक अल्लाह तआला की इबादत, कुरआन की तिलावत, तौबा, इस्तिग़फार और दुआ का बेहतरीन मौका है। हमें चाहिए कि इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा नेक अमल करें और अल्लाह तआला से अपनी मग़फिरत और रहमत की दुआ मांगें।
अल्लाह तआला हम सबकी इबादतों को क़ुबूल फरमाए, हमारी मग़फिरत फरमाए और हमें रमज़ान की बरकतों से मालामाल फरमाए। आमीन।
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